NATO की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह आर्कटिक में सुरक्षा बनाए रखने के लिए “अगले कदमों” पर चर्चा कर रहा है। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ के देश EU संधि के आपसी रक्षा क्लॉज को लागू करने पर विचार कर रहे हैं, जिसका मतलब ये हुआ कि अगर अमेरिका हमला करता है तो यूरोप जंग में जा सकता है। यूरोप के एक अधिकारी ने MS NOW से इसकी पुष्टि की है। यूरोपीय नेता ने कहा है कि ‘आर्टिकल 42.7’ को लागू करने पर बात चल रही है। इस क्लॉज में कहा गया है कि “अगर कोई सदस्य देश अपने इलाके में हथियारों से हमले का शिकार होता है, तो दूसरे सदस्य देशों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपनी पूरी ताकत से उसकी मदद करें।”
यूरोप का आर्टिकल 42.7 क्या है ?
- यूरोपियन यूनियन (TEU) की संधि का अनुच्छेद 42.7 एक सहायता क्लॉज है।
- ये एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत यूरोप की रक्षा करने का संकल्प लिया गया है।
- सशस्त्र हमला होने की स्थिति में सैन्य सहायता भेजने का है कानूनी प्रावधान
- यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है, तो अन्य सदस्य देशों को अपनी सेना भेजना होगा।
- पारंपरिक रूप से तटस्थ देशों (जैसे, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया) को ये कानून अपनी स्थिति का उल्लंघन करने के लिए मजबूर नहीं करता है।
- फ्रांस एकमात्र ऐसा देश है जिसने आर्टिकल 42.7 का इस्तेमाल किया है। उसने 17 नवंबर 2015 को पेरिस में हुए आतंकवादी हमलों के बाद किया था।
यूरोप ने आर्टिकल 42.7 लागू किया तो क्या होगा?
यूरोपीय संघ अगर आर्टिकल 42.7 लागू करता है तो डेनमार्क को सैन्य मदद देने का रास्ता खुल जाएगा। इसके बाद यूरोपीय संघ के देशों को डेनमार्क और ग्रीनलैंड में सैनिकों को भेजने की इजाजत मिल जाएगी। हालांकि इस क्लॉज के लागू होने का मतलब ये है कि सभी यूरोपीय संघ के देश अपने सैनिकों को भेजने के लिए मजबूर होंगे, लेकिन कुछ तटस्थ देशों को इससे छूट मिली हुई है। इसीलिए अगर ये क्लॉज एक्टिव होता है तो मामला काफी दिलचस्प हो जाएगा। रिपोर्ट में ग्रीनलैंड और डेनमार्क के डिप्लोमेट्स के हवाले से कहा हया है कि लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री, जिन्हें ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था, उन्होंने फिलहाल अपनी भूमिका या आर्कटिक द्वीप के साथ अमेरिका के संबंधों के बारे में डेनमार्क या ग्रीनलैंड के अधिकारियों से संपर्क नहीं किया है।
जब पूछा गया कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो क्या NATO उसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध होगा, तो 32 देशों के गठबंधन के एक प्रवक्ता ने कहा, कि महासचिव मार्क रुट्टे सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए अपने बयानों से आगे नहीं जाएंगे। रुट्टे ने कहा था कि “हम सच में यहां मिलकर काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि “और मेरी एकमात्र चिंता यह है, कि हम रूसियों से, किसी भी दूसरे दुश्मन से कैसे सुरक्षित रहें? देखिए चीन क्या कर रहा है, वह तेजी से अपनी सेना बढ़ा रहा है, लेकिन उत्तर कोरियाई और दूसरे लोग भी हैं जो हमारा बुरा चाहते हैं, वो कम से कम अच्छा तो बिल्कुल नहीं चाहते। इसलिए यही मेरी भूमिका है और मुझे लगता है कि हम समझौते पर पहुंच जाएंगे।”














