इटली पीएम मेलोनी ने शुक्रवार को नए साल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए अमेरिका और ग्रीनलैंड के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा, ‘मुझे यह विश्वास नहीं होता है कि अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए मिलिट्री का इस्तेमाल किया जाएगा। ग्रीनलैंड में मिलिट्री कार्रवाई किसी के फायदे में नहीं होगी और इसका नाटो पर भी बुरा असर होगा।’
इटली सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं: मेलोनी
मेलोनी ने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए आर्कटिक क्षेत्र में NATO की भूमिका मजबूत की जानी चाहिए। मेलोनी ने यह भी साफ किया कि इटली सैन्य कार्रवाई किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने इस पूरे मामले का बिना किसी सैन्य टकराव के हल निकालने पर जोर दिया।
वाइट हाउस की ओर से इस मंगलवार को जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इन विकल्पों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज समृद्ध द्वीप ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के लिए सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। इसने डेनमार्क के अर्ध स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड में हलचल मचा दी है।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर
ग्रीनलैंड उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक सागर के बीच स्थित दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। यह भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से डेनमार्क का हिस्सा है। द्वीप की सुरक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के पास है। ग्रीनलैंड की आबादी करीब 57,000 की है।
अमेरिका वर्षों से ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जताता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर बेहद आक्रामक रुख दिखाया है। ट्रंप का कहना है कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहता है, भले इसके लिए कोई तरीका अपनाना पड़े। ट्रंप चीन और रूस से खतरा बताते हुए अमेरिकी सुरक्षा के लिए इस द्वीप पर नियंत्रण जरूरी बताते हैं।














