डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अपने बयान में कहा, ‘ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का मतलब नाटो मिलिट्री गठबंधन का खत्म होना होगा। अमेरिका किसी दूसरे नाटो देश पर सैन्य हमला करता है तो सब कुछ रुक जाएगा। यह नाटो और दूसरे विश्व युद्ध के बाद दी गई सुरक्षा खत्म कर देगा। ट्रंप के ग्रीनलैंड पर बयानों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हम यह स्वीकार नहीं करेंगे, जहां हमें इस तरह धमकी दी जाए।’
ट्रंप के बयानों से डर
ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा, ‘ग्रीनलैंड पर कंट्रोल की कोशिश के विनाशकारी नतीजे होंगे। ग्रीनलैंड की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती। हम ऐसी स्थिति में नहीं हैं, जहां रातों-रात देश पर कब्जा कर लिया जाए। इसीलिए हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हम सहयोग चाहते हैं।’
डोनाल्ड ट्रंप ने बीते साल जनवरी में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद कई दफा ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही थी। कुछ महीने की चुप्पी के बाद अब उन्होंने फिर से इस पर बयान दिए हैं। रविवार तो उन्होंने 20 दिनों में ग्रीनलैंड के बारे में कुछ होने का संकेत दिया है। 20 दिन की इस डेडलाइन ने इस अंदेशे को बढ़ाया है कि अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड में हस्तक्षेप होने वाला है।
क्यों खास है ग्रीनलैंड
ग्रीनलैंड करीब 57,000 की आबादी वाला द्वीप है। इस द्वीप को 1979 से मौटेतौर पर स्व-शासन हासिल है, जहां उनका अपना पीएम बनता है। हालांकि ग्रीनलैंड की रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के पास है। ग्रीनलैंड में अक्सर डेनमार्क से पूरी तरह अलग होकर अपनी सेना और अलग विदेश नीति की मांग उठती है। इसका मतलब अमेरिका से नजदीकी नहीं है। ग्रीनलैंड में अमेरिका के कंट्रोल के खिलाफ बड़े पैमाने पर गुस्सा देखा जाता है।













