रूसी राष्ट्रपति पुतिन से करीबी रूप से वैचारिक रूप से जुड़े दुगिन ने दलील दी कि ट्रंप जिस तरह से ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए दबाव डाल रहे हैं, इससे रूस को भी पूरे यूरेशिया इलाके में अंतरराष्ट्रीय कानून को धता बताते हुए अपनी जमीन को बढ़ाने का मौका मिल जाएगा। अक्सर पश्चिमी देशों पर निशाना बनाने वाले अलेक्जेंडर दुगिन ने कहा कि रूस को एक ऐसी दुनिया में अपनी विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए ‘कुछ भयानक करना होगा’ जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों की बजाय ताकत से नतीजे निर्धारित किए जाते हैं।
रूस इन 7 देशों में करे अपना क्षेत्रीय विस्तार: दुगिन
पुतिन के गुरु ने ट्रंप के उस बार-बार दिए जा रहे बयान का हवाला दिया जिसमें वह कह रहे हैं कि वैश्विक सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का पूरा कब्जा अमेरिका के लिए जरूरी है। दुगिन ने कहा कि रूस को भी इस औपनिवेशिया तर्क को खुलेआम अपनाना चाहिए और अपना क्षेत्रीय विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अगर अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर नए इलाके पर दावा करता है तो रूस को भी यही करना चाहिए। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘केवल क्रूरता, ताकत, व्यापक तबाही ट्रंप जैसी दुनिया में मायने रखता है।’
अलेक्जेंडर दुगिन ने आर्मेनिया, जार्जिया, अजरबैजान, कजाखस्तान, उज्बेकिसतान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे इलाकों को सूचीबद्ध किया और कहा कि रूस को इन जगहों पर प्रभाव जमाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। इसे रूस के औपनिवेशिक प्रभाव को फिर बनाने के प्रयास के रूप में पेश किया जाना चाहिए। दुगिन ने पुतिन को सलाह दी कि मास्को को अंतरराष्ट्रीय कानून को किनारे करके ‘यूरेशियन मोनरो डॉक्ट्रिन’ को अपना चाहिए। साथ ही एक ऐसी दुनिया को स्वीकार करना चाहिए जहां पर अमेरिका, रूस और चीन का दबदबा है।
रूस मध्य एशिया और काकेकस में बढ़ाए प्रभाव
दुगिन ने कहा, ‘अगर ट्रंप कहते हैं कि यह मेरा इलाका है और यह अमेरिकी होगा तो हमें भी यह कहना चाहिए कि यह हमारा इलाका है, यह रूसी होगा।’ उन्होंने कहा कि रूस को मध्य एशिया और काकेकस इलाके में बड़े पैमाने पर अपना राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रभाव बढ़ाना जारी रखना चाहिए। इन इलाकों से लाखों लोग रूस में काम करते हैं। ये लोग अपने देश में घर पैसा भेजते हैं। दुगिन ने बाल्टिक देशों और मोल्दोवा में भी दबाव बनाने को लेकर चेतावनी दी।













