ग्रीनलैंड में पूरी पहुंच का दावा
फॉक्स बिजनेस से ट्रंप ने कहा कि अभी भी इसकी डिटेल्स पर बात चल रही है लेकिन असल में यह पूरी पहुंच है। इस बीच ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने सैन्य कार्रवाई न करने के ट्रंप के फैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें किसी समझौते की जानकारी नहीं है। नीलसन ने शुक्रवार को डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन से मुलाकात की जो ट्रंप की धमकियों के बीत स्वायत्तशासी द्वीप के दौरे पर पहुंची थीं।
फ्रेडरिक्सन ने कहा हम अगले कदमों की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन सबसे पहले और सबसे जरूरी बात यह है कि मुश्किल समय में ग्रीनलैंड के लोगों के लिए अपना मजबूत समर्थन दिखाऊं। यूरोप ने ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकियों को लेकर मजबूत रुख अपनाया है जिससे ट्रंप को अपनी टैरिफ धमकियों पर यू-टर्न लेना।
ग्रीनलैंड में अमेरिका की मौजूदगी
डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में नाटो प्रमुख मार्क रट के साथ एक बैठक के बाद कहा था कि उन्हें ग्रीनलैंड के लिए पूरी और स्थायी पहुंच मिल गई है। हालांकि, अमेरिकी सेना को ग्रीनलैंड में पहले से ही काफी मंजूरी मिली हुई है और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से ही द्वीप पर अमेरिका की मौजूदगी है। हालांकि, शीत युद्ध के बाद अमेरिकी सेना ने अपनी मौजूदगी कम करके सिर्फ एक छोटे बेस तक सीमित कर दी है।
ट्रंप ने बताया कि गुरुवार को मार्क रट के साथ उनकी बहुत प्रोडक्टिव बैठक हुई, जिसमें ग्रीनलैंड को लेकर एक डील के फ्रेमवर्क पर सहमति बनी। द सन ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी कथित तौर पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच 1951 के एक समझौते को अपडेट करने के लिए बातचीत पर सहमत हो गया है। यह आर्कटिक द्वीप पर अमेरिकी सेना की पहुंच और मौजूदगी को कवर करेगा। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, जिस ब्लूप्रिंट पर चर्चा हुई है, उसमें ग्रीनलैंड में चीनी और रूसी निवेश पर भी रोक लगाई है।













