पिछले साल यानी 2025 में सोने ने करीब 70 फीसदी तो चांदी ने 160 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया था। वहीं तांबे का रिटर्न 50 फीसदी से ज्यादा था। इस साल जनवरी के आखिर में तीनों धातुओं की कीमत नए रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन इसके बाद आई तीन दिन की गिरावट ने सब कुछ बदल दिया। सोना, चांदी और तांबा तीनों धातुओं की कीमत धाराशाई हो गई। हालांकि बाद में इनमें कुछ तेजी भी आई, लेकिन निवेशकों को खुश नहीं कर पाई।
सोना-चांदी बेचकर मुनाफा कमाएं और भाग जाएं! एक्सपर्ट ने दी निवेशकों को सलाह, क्यों कहा ऐसा?
तांबे की चर्चा क्यों?
इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जा परिवर्तन) से तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है बढ़ती मांग ने तांबे को चर्चा में ला दिया है और काफी निवेशक इसमें निवेश कर रहे हैं। जिस तरह से इसने पिछले साल रिटर्न दिया, उससे निवेशकों को उम्मीद है कि यह धातु इस साल भी जेब भर सकती है और सोना व चांदी का नया विकल्प बन सकती है।
इस साल क्या है स्थिति?
इस साल रेकॉर्ड तेजी और फिर रेकॉर्ड गिरावट के बावजूद सोना और चांदी निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई है। इस साल सोने का रिटर्न चांदी से ज्यादा रहा है। तीनों धातुओं का इस साल अभी तक रिटर्न इस प्रकार रहा है:
- 31 दिसंबर 2025 को एमसीएक्स पर सोना प्रति 10 ग्राम करीब 1.40 लाख रुपये पर था। कल शुक्रवार को यह करीब 1.57 लाख पर बंद हुआ। ऐसे में इसने अभी तक 12.14 फीसदी रिटर्न दिया है।
- 31 दिसंबर 2025 को एमसीएक्स पर चांदी प्रति 2.35 रुपये पर बंद हुई थी। कल शुक्रवार को इसका भाव 2.52 रुपये पर रहा। ऐसे में चांदी ने इस साल 7.23 फीसदी का रिटर्न दिया। यानी सोने के मुकाबले करीब आधा।
- तांबे ने इस साल निवेशकों को निराश किया है। 31 दिसंबर 2025 को तांबे का भाव करीब 1222 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था। कल शुक्रवार को यह 1169 रुपये पर बंद हुआ। ऐसे में इसने इस साल निवेशकों का 4 फीसदी से ज्यादा नुकसान किया है।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
रूंगटा सिक्योरिटिज के सीईओ और सीएफपी हर्ष वर्धन रूंगटा ने सलाह दी कि किसी भी कमोडिटी में निवेश करने से पहले अपने मकसद को साफ करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को खुद से पूछना चाहिए कि क्या वे कम समय के लिए तांबे में ट्रेडिंग करना चाहते हैं या फिर लंबे समय तक बढ़ती कीमतों का फायदा उठाना चाहते हैं। इस बात की स्पष्टता के बिना, इस तरह के अस्थिर बाजार में उतरना जोखिम भरा हो सकता है।
इन तरीकों से कर सकते हैं निवेश
रूंगटा ने समझाया कि तांबे में निवेश के दो मुख्य तरीके हैं। पहला तरीका है मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर तांबे के फ्यूचर्स (वायदा) में ट्रेडिंग करना। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में काफी लेन-देन होता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदना और उसमें ट्रेड करना आसान नहीं है। इसमें मार्जिन की जरूरत होती है, रोजाना बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से पैसे का हिसाब-किताब होता है और कीमतों में अचानक बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। अगर इन सब बातों को ठीक से न समझा जाए, तो भारी नुकसान हो सकता है।
दूसरा तरीका है, तांबे की माइनिंग (खनन) और प्रोडक्शन (उत्पादन) करने वाली कंपनियों के शेयरों में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश करना। इस तरीके में निवेशक सीधे तांबा नहीं खरीदते, बल्कि उन कंपनियों के शेयर खरीदते हैं जो तांबे का खनन और उत्पादन करती हैं। रूंगटा ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरीके में भी जोखिम हैं। शेयर की कीमतें कई बातों पर निर्भर करती हैं, जैसे कंपनी का मैनेजमेंट, दुनिया भर की मांग का चक्र, परिचालन लागत और बाजार की कुल स्थिति।
डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, आज़ाद हिन्द के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।













