चुनावी रेवड़ियों के खिलाफ सुनवाई का रास्ता साफ
गुरुवार को इस मामले में याचिककर्चा और वकील अश्विनी उपाध्याय ने सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि उनकी जनहित याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को 2022 में ही नोटिस जारी किया गया था और अदालत से गुहार लगाई कि इस मामले को सुनवाई के लिए जल्द लिस्ट किया जाए।
‘सूरज और चांद छोड़कर हर तरह का चुनावी वादा’
अश्विनी कुमार ने कहा, ‘सूरज और चांद छोड़कर चुनावों के दौरान राजनीतिक दल हर वादा करते हैं, जो भ्रष्ट आचरण के समान है।’ इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। आप प्लीज हमें याद दिलाना और अंत में इसका ज़िक्र करना। मार्च में हम लिस्ट करेंगे।’
‘रेगुलर बजट से ज्यादा हो जाता है चुनावी रेवड़ी बजट’
25 जनवरी, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में तत्कालीन सीजेआई एन वी रमना ने इस केस में केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस देकर जवाब मांगा था। तब भी बेंच ने इसे ‘गंभीर मुद्दा’ बताया था और कहा था कि कई बार ‘फ्रीबी बजट रेगुलर बजट से ज्यादा हो जाता है।’ याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि जनता के खजाने से ‘तर्कहीन चुनावी रेवड़ियों’ का वादा करना न सिर्फ वोटरों को गलत तरह से प्रभावित करता है, बल्कि न चुनावी लड़ाई में एक तरह का मैदान रह जाता है और पूरी चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता भी नष्ट कर देता है।
चुनावी रेवड़ियों के खिलाफ कानून की भी मांग
याचिका में केंद्र को इसके खिलाफ कानून लाने की मांग करते हुए यह भी कहा गया है कि इस तरह की चुनावी रेवड़ियों के नाम पर राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करना न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों के वजूद के लिए खतरा है, बल्कि यह संविधान की भावना को भी आहत करता है। इसके अनुसार, ‘यह अनैतिक परंपरा सत्ता में रहने के लिए सरकारी खजाने के दम पर मतदाताओं को रिश्व देने के समान है और लोकतांत्रिक सिद्धांतों और प्रक्रियाओं को सुरक्षित रखने के लिए इसे रोकना जरूरी है।'(पीटीआई इनपुट के साथ)













