यह स्पेसएक्स के लिए एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। स्पेसएक्स अमेरिका की स्पेस कंपनी नासा (NASA) के लिए एक अहम कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदार) बन गई है। साथ ही, मस्क की यह योजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चांद पर इंसानी मिशन भेजने के जोर से भी मेल खाती है। एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘जो लोग नहीं जानते, स्पेसएक्स ने अब चांद पर एक ऐसी सिटी बनाने पर फोकस किया है जो खुद-ब-खुद बढ़ती रहे। हम इसे 10 साल से भी कम समय में हासिल कर सकते हैं, जबकि मंगल ग्रह पर यह काम 20 साल से ज्यादा लेगा।’
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मंगल ग्रह का प्लान क्यों टाला?
मस्क ने इस बदलाव की वजह लॉजिस्टिक्स (सामान पहुंचाने और व्यवस्था) की मुश्किलें बताईं। उन्होंने कहा कि मंगल ग्रह की यात्रा ग्रहों की चाल पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि मंगल ग्रह पर जाने का मौका हर 26 महीने में ही मिलता है, जब ग्रह एक सीध में आते हैं। लेकिन हम हर 10 दिन में चांद पर लॉन्च कर सकते हैं।
हालांकि मस्क ने मंगल ग्रह का अपना प्लान बंद नहीं किया है। मस्क ने जोर देकर कहा कि मंगल ग्रह अभी भी स्पेसएक्स के लंबे समय के विजन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कंपनी मंगल ग्रह पर भी सिटी बनाने की कोशिश करेगी और लगभग 5 से 7 साल में इस पर काम शुरू कर देगी।
मस्क ने कई बार बदली तारीखें
- स्पेसएक्स की मंगल ग्रह पर जाने की योजनाओं पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। आलोचक कहते थे कि मस्क की टाइमलाइन (समय-सीमा) बहुत ज्यादा उम्मीदों वाली है।
- मस्क ने मंगल ग्रह पर इंसानी मिशन भेजने की अपनी तारीखें कई बार बदली हैं। 2016 में उन्होंने कहा था कि अगर पैसा और तकनीक की दिक्कतें दूर हो गईं तो 2024 तक यात्री मंगल पर जा सकते हैं।
- इससे पहले साल 2011 में उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया था कि स्पेसएक्स के अंतरिक्ष यात्री मंगल पर सबसे अच्छे हालात में 10 साल में, और सबसे खराब हालात में 15 से 20 साल में पहुंच जाएंगे।
चांद पर फिर से फोकस क्यों?
- चांद पर फिर से ध्यान देने की वजह ट्रंप प्रशासन की अंतरिक्ष नीति में आया बदलाव भी है।
- पिछले साल के अंत में ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर (कार्यकारी आदेश) जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं कि साल 2028 तक अमेरिकी चांद पर हों।
- यह नासा के आर्टेमिस (Artemis) प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके लिए स्पेसएक्स एक मुख्य कॉन्ट्रैक्टर है।
- यह ट्रंप के उस पहले वाले लक्ष्य से अलग था, जिसमें वे अपने चार साल के कार्यकाल के अंत तक मंगल ग्रह पर अमेरिकी झंडा फहराना चाहते थे।
नासा का चांद पर भेजने का प्लान
नासा की फिलहाल योजना है कि वह आर्टेमिस 3 मिशन के तहत 2027 के मध्य में अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर वापस भेजे। हालांकि, इस शेड्यूल में कई बार देरी हो चुकी है। इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें और देरी हो सकती है, क्योंकि स्पेसएक्स द्वारा बनाया जा रहा चांद पर उतरने वाला लैंडर (यान) अभी तैयार नहीं है। इस बदलाव के बावजूद, मस्क का कहना है कि चांद पर इंसानी बस्ती बनाने में तेजी से प्रगति हो सकती है। मस्क के मुताबिक चांद तक आसान पहुंच का मतलब है कि हम चांद पर सिटी बनाने के लिए मंगल ग्रह पर सिटी बनाने की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से काम कर सकते हैं।
चांद पर पहुंचना कितना खर्चीला?
चांद पर पहुंचना काफी खर्चीला भी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अंतरिक्ष कंपनियों को चांद की कक्षा में पहुंचने में ही 100 अरब डॉलर से ज्यादा कर रकम खर्च करनी पड़ सकती है। वहीं अगर कोई प्राइवेट कंपनी यात्रियों को चांद की कक्षा में लेकर जाए तो प्रति सीट खर्च 100 मिलियन से 750 मिलियन डॉलर के बीच हो सकता है। चांद पर नील आर्मस्ट्रांग ने पहली बार कदम रखा था। वह अमेरिका के अपोलो 11 यान ने जुलाई 1969 में चांद पर पहुंचे थे। उस मिशन का खर्च उस समय करीब 350 मिलियन डॉलर था जो आज के करीब 250 अरब डॉलर के बराबर है। वहीं नासा का आर्टेमिस मिशन का चांद तक पहुंचने का खर्च करीब 95 अरब डॉलर हो सकता है।













