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  • चाबहार पोर्ट तक पहुंची ईरान के प्रदर्शन की आंच, भारत की बढ़ी टेंशन, तालिबान से लड़ रहा पाकिस्‍तान होगा खुश

    तेहरान: ईरान की राजधानी तेहरान समेत ज्यादातर बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। देश की करेंसी में गिरावट और महंगाई के मुद्दे पर शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन अब भीषण रूप लेते दिख रहे हैं। ईरान में दो हफ्ते से जारी इन प्रोटेस्ट की वजह से राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ रहा है।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    तेहरान: ईरान की राजधानी तेहरान समेत ज्यादातर बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। देश की करेंसी में गिरावट और महंगाई के मुद्दे पर शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन अब भीषण रूप लेते दिख रहे हैं। ईरान में दो हफ्ते से जारी इन प्रोटेस्ट की वजह से राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ रहा है। इसने भारत की चिंता को भी बढ़ा दिया है। भारत की चिंता इन प्रदर्शनों का असर चाबहार पोर्ट तक पहुंचने को लेकर है। ये पोर्ट भारत के लिए ना सिर्फ आर्थिक बल्कि चीन-पाकिस्तान के मुकाबले के लिए रणनीतिक लिहाज से भी खास है।

    CNN-News18 ने टॉप इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान में बड़े पैमाने पर हिंसा से चाबहार पोर्ट में भारत का लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट अनिश्चितता में है। ईरान में विरोध प्रदर्शनों से पैदा हुई हलचल ने दिल्ली में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट पर सुरक्षा और ऑपरेशन की निरंतरता को लेकर फिक्र पैदा की है।

    ईरान में टूट रही सप्लाई चेन

    इंटेलिजेंस सूत्र कहते हैं कि हड़ताल, इंटरनेट बंद और लोगों के सड़कों पर उतरने से ईरान में सप्लाई-चेन टूट रही है। ये चाबहार में कार्गो हैंडलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में देरी कर सकती हैं। भारत ने इस पोर्ट में 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह पोर्ट भारत को आर्थिक गेटवे के रूप में पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक पहुंच देता है।

    चाबहार भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी के लिए जरूरी है, जिसका मकसद उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के साथ व्यापार बढ़ाना है। चाबहार इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में अहम कड़ी है, जो 7,200 किलोमीटर का मल्टीमॉडल शिप-रेल-रोड नेटवर्क है। यह भारत को ईरान, कैस्पियन सागर, रूस और यूरोप से जोड़ता है।

    भारत को कैसे होगा नुकसान

    INSTC कॉरिडोर पारंपरिक स्वेज नहर रूट की तुलना में ट्रांजिट टाइम को 40 प्रतिशत और लागत को 30 प्रतिशत कम करता है। इससे शिपिंग का समय 25-30 दिन कम हो जाता है। ईरान में कोई भी लंबे समय तक चलने वाली अस्थिरता इस फायदे को खत्म कर सकती है। यह भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान देगा।

    चाबहार-जाहेदान रेलवे प्रोजेक्ट पर भी चिंता है, जो INSTC इंटीग्रेशन का मुख्य हिस्सा है। मजदूरों की हड़ताल, फंडिंग में रुकावट या लंबे समय चलने वाले प्रदर्शन रेल कनेक्टिविटी में देरी कर सकते हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के निचले रैंक के अधिकारी भी आर्थिक संकट से प्रभावित हैं, जिससे मजदूरों के मनोबल और सुरक्षा स्थितियों पर असर पड़ सकता है।

    चीन उठा सकता है फायदा

    भारत इस बात से भी चिंतित है कि ईरान में अस्थिरता से पैदा हुए खालीपन का फायदा चीन उठा सकता है। चाबहार पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट पर चीन के बढ़ते दबदबे का मुकाबला करता है और बीजिंग की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का एक मुख्य स्तंभ है। चीन की कोशिश होगी चाबहार से भी भारत का प्रभाव कम किया जाए। पाकिस्तान भी भारत की उपस्थिति चाबहार में नहीं चाहता है।

    चाबहार का भारत के लिए महत्लव आर्थिक स्तर से ज्यादा है। यह भारत को अरब सागर और हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक और कमर्शियल गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करता है।। ऐसे में चाबहार में कोई भी रुकावट भारत के लिए दूरगामी रणनीतिक परिणाम ला सकती है। इसे देखते हुए भारत की नजर ईरान की स्थिति पर बनी हुई है।

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