लाइव साइंस के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में एक नए खर्च बिल को मंजूरी दी है। यह बिल उनके लिए झटका है, जो पर्सेवरेंस के 30 भूवैज्ञानिक नमूनों की जांच करने की उम्मीद कर रहे थे। इसमें वह नमूना भी शामिल है, जिसे नासा ने मंगल ग्रह पर अब तक मिला जीवन का सबसे स्पष्ट संकेत माना था। अब इन नमूनों के 2040 तक पृथ्वी पर आने की उम्मीद नहीं है।
नासा ने बदली रणनीति
नासा ने प्रोग्राम में एक बड़े बदलाव के तहत कहा है कि वह नमूनों को लाने के लिए दो अलग-अलग रणनीतियों पर काम करेगा। इसमें एक आजमाया हुआ लैंडिंग सिस्टम होगा, जिसमें रॉकेट से चलने वाली स्काई क्रेन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी कुल अनुमानित लागत 6.6 से 7.7 अरब डॉलर के बीच होगी।
नासा ने 2026 में इस पर फैसला करने की योजना बनाई थी। द प्लैनेटरी सोसाइटी का कहना है कि 110 मिलियन डॉलर का आवंटन सैंपल रिटर्न के भविष्य के लिए उम्मीद जगाता है। हालांकि इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि अमेरिका अब लाल ग्रह पर जीवन की तलाश में दिलचस्पी छोड़ रहा है।
चीन के लिए मंगल पर मौका!
अमेरिका मंगल ग्रह से सैंपल वापस लाने का सपना छोड़ देता है तो चीन के लिए कोई वहां मुकाबला नहीं बचेगा। चीन का तियानवेन-3 सैंपल रिटर्न मिशन उस जगह की तुलना में आसानी से पहुंचने वाली और कम संभावना वाली जगह से सैंपल इकट्ठा करने का लक्ष्य रखता है। जहां जीवन के संभावित संकेतों की तलाश की जा रही है।
तियानवेन-3 मिशन 2028 में लॉन्च होने और 2031 में चट्टानें वापस लाने के लिए शेड्यूल किया गया है। सैंपल रिटर्न को एक रेस की तरह मान लिया जाए तो चीन अब इसे अकेले दौड़कर जीत सकता है। यह अंतरिक्ष में चीन के लिए अमेरिका पर एक बड़ी जीत की तरह होगा। हालांकि इस पर अभी कोई फाइनल बात कहना जल्दीबाजी होगी।
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट
साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिक और मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम एनालिसिस ग्रुप की चेयरपर्सन विक्टोरिया हैमिल्टन ने लाइव साइंस की सिस्टर साइट स्पेस डॉट कॉम से कहा, ‘यह समझना मुश्किल है कि MSR को कैंसिल करने साफ है कि मंगल ग्रह से सैंपल वापस लाना अमेरिका के लिए बहुत मुश्किल है।












