खास बात है कि चीन अपने जे-10सी फाइटर को बेचने के लिए प्रोपेगैंडा फैला रहा है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहा है। इसके लिए भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल मई में हुए सैन्य टकराव का इस्तेमाल कर रहा है। चीन इसे यु्द्ध में आजमाया हुआ कॉम्बैट फाइटर बता रहा है। दरअसल, चीन के इस विमान का इस्तेमाल पाकिस्तान भी करता है। पाकिस्तान का कहना है कि उसने भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान J-10C का इस्तेमाल किया था। अब चीन इसे भुनाने की कोशिश में लग गया है।
चीनी J-10C को नहीं मिल रहा खरीदार
अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान J-10C के लिए पूरा जोर लगाने के बावजूद चीन को अब तक बहुत कम सफलता मिली है। चीन के सहारे चलने वाला पाकिस्तान ही इस फाइटर जेट का एकमात्र खरीदार बना हआ है। हालांकि, ब्राजील, मिस्र, इंडोनेशिया, कोलंबिया और ईरान जैसे देशों के साथ इसने बातचीत की है लेकिन आज भी बीजिंग को दूसरे ग्राहक का इंतजार है। इसके साथ ही चीन अपने J-35A को भी एयरशो में दिखा रहा है।
पाकिस्तान वाला JF-17 भी दिखा रहा चीन
एयरशो में दिखाया जा रहा चीन का तीसरा प्रमुख फाइटर JF-17 है, जिसने उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर तैयार किया है। JF-17 की भागी ऐसे समय में हो रही है, जब कथित तौर पर पाकिस्तान को हाल ही में अपने इस फाइटर की खरीद के लिए अनुरोध मिला है। इसमें इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और लीबिया शामिल है। पाकिस्तान ने मई में भारत के साथ टकराव के दौरान JF-17 का इस्तेमाल करके भारत के राफेल को गिराने का दावा किया था। इसे चीन की प्रोपेगैंडा मशीनरी ने हवा दी थी, लेकिन बाद में यह प्रोपेगैंडा ध्वस्त हो गया।
प्रोपेगैंडा के सहारे बेचने की कोशिश
इसके बावजूद चीनी J-10C और JF-17 के लिए मार्केट में अच्छी संभावना बता रहे हैं और एक बार फिर मई में उनके कथित सफल परफॉर्मेंस का हवाला दे रहे हैं। चीन दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ ही मिडिल ईस्ट में भी अपने एयरक्राफ्ट को प्रमोट कर रहा है। चीन अमेरिकी मिलिट्री हार्डवेयर की तुलना में जल्दी डिलीवरी और कम शर्तों पर पर जोर दे रहा है, ताकि नए ग्राहकों को लुभाया जा सके।













