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  • चीन की नई ‘ब्रह्मास्त्र’ मिसाइल ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन: अमेरिका को भी पछाड़ा, फेल हो जाएंगे दुनिया के सारे एयर डिफेंस सिस्टम

    बीजिंग: चीन लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइलों के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। इससे अमेरिका घबराया हुआ है और वह चीन के खिलाफ अलग-अलग पैंतरें चल रहा है। अमेरिका को सबसे ज्यादा डर चीन की CJ-1000 मिसाइल से है। चीन की CJ-1000 मिसाइल में स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा हुआ है, जो इसे


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    By Azad Hind Desk फरवरी 19, 2026
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    बीजिंग: चीन लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइलों के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। इससे अमेरिका घबराया हुआ है और वह चीन के खिलाफ अलग-अलग पैंतरें चल रहा है। अमेरिका को सबसे ज्यादा डर चीन की CJ-1000 मिसाइल से है। चीन की CJ-1000 मिसाइल में स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा हुआ है, जो इसे आवाज के कई गुना तेज स्पीड पर उड़ने में मदद करता है। विशेषज्ञों का दावा है कि अमेरिका का THAAD और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम चीनी CJ-1000 मिसाइल को नहीं रोक सकते हैं।

    चीन ने कब किया था CJ-1000 मिसाइल का प्रदर्शन

    चीन ने पिछले साल सितंबर में बीजिंग में आयोजित विक्ट्री डे मिलिट्री परेड के दौरान शिप से लॉन्च होने वाली YJ-19 के साथ, CJ-1000 रोड-मोबाइल क्रूज मिसाइल का प्रदर्शन किया था। इन दोनों मिसाइलों को एडवांस्ड एयर-ब्रीदिंग स्क्रैमजेट इंजन से पावर मिलती है। ये रूस की शिप-बेस्ड 3M22 जिरकोन के अलावा दुनिया की सिर्फ दो ऑपरेशनल स्क्रैमजेट-आधारित हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। वहीं, चीनी CJ-1000 अपनी तरह का पहला और अब तक का इकलौता जमीन से लॉन्च होने वाला वेरिएंट है।

    DF-17 और अवांगार्ड से बेहतर है CJ-1000 मिसाइल

    शिपबोर्न वेपन्स मैगज़ीन के फरवरी के अंक में लिखा है, स्क्रैमजेट इंजन, चीन के DF-17 और रूस के अवांगार्ड जैसे ग्लाइडर व्हीकल की तुलना में हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए टेक्नोलॉजी के हिसाब से बेहतर हैं। हालांकि, ऐसे इंजनों को विकसित करना काफी मुश्किल होता है। आर्टिकल में कहा गया है, “CJ-1000 मिसाइल का आना चीन के सबसे एडवांस्ड एयरोस्पेस डोमेन में पीछे रहने से लीड करने की पोजीशन लेने की ओर बदलाव को दिखाता है।”

    ग्लाइडर व्हीकल की तुलना में स्क्रैमजेट मिसाइलें खतरनाक क्यों?

    स्क्रैमजेट मिसाइलों की क्रूज ऊंचाई 20km से 30km होती है, जो ग्लाइडर व्हीकल की तुलना में बहुत कम है। ग्लाइडर व्हीकल लगभग 60km से 80km की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं। दुश्मन के एयर डिफेंस रडार के लिए, मिसाइल जितनी नीचे उड़ती है, उसे डिटेक्ट करना और रिस्पॉन्ड करना उतना ही मुश्किल होता है। इसके अलावा स्क्रैमजेट इंजन पूरे समय क्रूज और टर्मिनल फेज में काम करता है। यह लक्ष्य के खिलाफ ज्यादा मैनूवरेबिलिटी और एक्यूरेसी देता है। वहीं ग्लाइडर व्हीकल इसकी तुलना में फाइनल अप्रोच के दौरान इनर्शिया पर निर्भर रहते हैं।

    स्क्रैमजेट इंजन मामले में कैसे पिछड़ा अमेरिका?

    अमेरिका दुनिया का पहला देश था जिसने 1998 में ही स्क्रैमजेट से चलने वाली फ्लाइट का परीक्षण किया था। वह 2013 में हाइड्रोकार्बन से चलने वाले स्क्रैमजेट इंजन को उड़ान में 240 सेकंड तक लगातार चलाने वाला पहला देश था। लेकिन, अब अमेरिका का हाइपरसोनिक अटैक क्रूज़ मिसाइल प्रोजेक्ट अब पीछे चल रहा था। आर्टिकल में कहा गया है, “अमेरिका स्क्रैमजेट से चलने वाले हाइपरसोनिक सिस्टम के हथियार बनाने और ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट में चीन से पीछे रह गया है।”

    चीन की सफलता का राज क्या है?

    इस देरी की वजह खराब तरीके से बनी प्रोजेक्ट प्लानिंग, अव्यवस्थित मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी के पोटेंशियल को लेकर सीनियर लीडरशिप में पक्के यकीन की कमी बताई गई। आगे कहा गया है कि स्क्रैमजेट डेवलपमेंट में चीन का भारी इन्वेस्टमेंट, ज्यादा साइंटिफिक रूप से सही टेस्टिंग के तरीके, इंडस्ट्री-एकेडमिक-रिसर्च कोलेबोरेशन का मजबूत इंटीग्रेशन और नेशनल लेवल पर मजबूत समर्थन, इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने में मदद करने वाले जरूरी फैक्टर रहे हैं।

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