चीन के ताइवान पर साइबर हमले
एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान का आरोप है कि चीन की तरफ से जो साइबर अटैक किए जाते हैं, वह चीन अपने सैन्य अभ्यासों के साथ मिलकर करता है। गुजरे कुछ वर्षों से चीन की तरफ से ताइवान को ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ से टार्गेट किया जा रहा है। इसी के तहत साइबर अटैक किए जाते हैं। 2013 के मुकाबले साइबर अटैक 113 फीसदी बढ़ गए हैं। सबसे ज्यादा ताइवान के ऊर्जा क्षेत्र को, इमरजेंसी सेवाओं को और हॉस्प्टिल को निशाना बनाया जाता है। रिपोर्ट कहती है कि चीन साइबर अटैक करके ताइवान को तकनीकी तौर पर परेशान करना चाहता है।
चीन ने बनाई है ‘साइबर आर्मी’
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने एक साइबर आर्मी बनाई है जो अपने देश की सेना और सरकार के साथ मिलकर काम करती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने जब-जब अपने सैन्य विमानों को ताइवान के नजदीक भेजा है, उतनी बार ताइवान को साइबर हमले झेलने पड़े हैं।
क्या होते हैं DDoS अटैक?
DDoS का पूरा नाम है- डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस अटैक। यह साइबर अटैक का एक प्रकार है जिसमें हैकर्स अपने बॉट्स यानी ढेर सारे कंप्यूटरों की मदद से किसी वेबसाइट को टार्गेट करते हैं। वह वेबसाइट किसी अस्पताल, सरकार विभाग आदि से जुड़ी हो सकती है। अचानक से किसी वेबसाइट पर ढेर सारे लोड आने से वह ट्रैफिक को संभालने में असमर्थ हो जाती है और आम लोग उस वेबसाइट को एक्सेस नहीं कर पाते। कुल मिलाकर DDoS में एक वेबसाइट को ठप करके उसकी सर्विस को लोगों की पहुंच से दूर करने का प्रयास किया जाता है। यह सब इसलिए होता है ताकि वह काम ना कर पाए और लोगों को परेशानी उठानी पड़े।
मैन-इन-द-मिडिल अटैक भी
DDoS अटैक के अलावा चीन, ताइवान को मैन-इन-द-मिडिल अटैक से भी टार्गेट कर रहा है। यह भी साइबर हमले का एक प्रकार है। इस अटैक में साइबर अपराधी किसी वेबसाइट में दो लोगों के बीच हो रही बातचीत में खुद को एंट्री करवा देता है। वह उनकी बातचीत सुनता है और डेटा में सेंध लगाने की कोशिश की जाती है। इस तरह के अटैक करके साइबर हमलावर लोगों की निजी जानकारियां चुराने की कोशिश करते हैं।













