चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी को इस वित्तीय वर्ष में करीब 6,125 करोड़ का स्वैच्छिक योगदान मिला है, जो कि पिछले साल के 3,967 करोड़ से लगभग 54 प्रतिशत ज्यादा है। बीजेपी को पिछले साल करीब 3,967 करोड़ का चंदा मिला था। यह 2,158 करोड़ की वृद्धि चुनावी बॉन्ड से होने वाले कथित नुकसान की भरपाई से कहीं ज्यादा है।
कंपनियों से मिलने वाले दान में बढ़ोतरी
2023-24 में बीजेपी ने चुनावी बॉन्ड के जरिए लगभग 1,686 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त किया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड को खत्म करने के बाद, कंपनियों और संगठनों से मिलने वाले दान में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। बीजेपी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में कंपनियों से दान 5,422 करोड़ रहा, जबकि 2023-24 में यह धनराशि 1,885 करोड़ थी।
कांग्रेस की घटी आय
वहीं 2024-25 में कांग्रेस की कुल आय 918 करोड़ रही, उसने 1,123 करोड़ खर्च किए। देश के मुख्य विपक्षी दल को मिलने वाले चंदे की राशि में करीब 54 प्रतिशत गिरावट आई है। कांग्रेस को 2023-24 में करीब 1,130 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2024-25 में महज 522 करोड़ ही मिले थे। माना जा रहा है कि चुनावी बॉन्ड खत्म होने का असर कांग्रेस पर पड़ा है, क्योंकि कांग्रेस ने 2023-24 चुनावी बॉन्ड के जरिए कांग्रेस ने करीब 828 करोड़ रुपये की कमाई की थी।
बीजेपी को व्यक्तिगत दाताओं से भी पिछले वित्तीय वर्ष में 641 करोड़ मिले, जो 2023-24 के 240 करोड़ से काफी ज्यादा है। बीजेपी की 2024-25 की कुल आय 6,769 करोड़ रही, जो 2023-24 के 4,340 करोड़ से बढ़ी है। इसमें 6,125 करोड़ स्वैच्छिक योगदान, 634 करोड़ बैंक ब्याज, 5.7 करोड़ शुल्क और सदस्यता से और 4.5 करोड़ ‘अन्य आय’ शामिल है।
बीजेपी ने खर्च किए 3,775 करोड़
खर्चों की बात करें तो बीजेपी ने 2024-25 में कुल 3,775 करोड़ खर्च किए, जिसमें से 3,335 करोड़ चुनाव प्रचार पर खर्च हुए। यह 2023-24 के 1,754 करोड़ के मुकाबले लगभग दोगुना है। वहीं कांग्रेस ने 2024-25 में चुनाव प्रचार पर करीब 896 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कि 2023-24 के 620 करोड़ से ज्यादा है।
बीजेपी ने पिछले वित्तीय वर्ष में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रचार के लिए सबसे ज्यादा खर्च किया, जो लगभग 1,125 करोड़ रहा। जबकि 2023-24 में खर्च 435 करोड़ था। होर्डिंग्स पर बीजेपी ने करीब 107 करोड़ खर्च किए, हवाई यात्रा पर 583 करोड़ और उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में 313 करोड़ दिए गए। इसके अलावा, मोर्चों और रैलियों पर 91 करोड़ और मीटिंग के खर्चों पर लगभग 52 करोड़ खर्च हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 की शुरुआत में बीजेपी के पास सामान्य फंड में 9,170 करोड़ का ओपनिंग बैलेंस था और साल के अंत में 2,995 करोड़ का अधिशेष (सरप्लस) रहा, जिससे क्लोजिंग बैलेंस 12,164 करोड़ हो गया। 31 मार्च 2025 तक पार्टी के पास 9,996 करोड़ नकद और नकद समकक्ष के रूप में थे, जो एक साल पहले के ₹7,114 करोड़ से ज्यादा है।














