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  • चूं चपड़ नहीं करेगा चीन, बांग्लादेश से बंगाल की खाड़ी तक, जल-जमीन-आसमान से घिरेगा दुश्मन

    नई दिल्ली: बांग्लादेश में अस्थिरता शुरू होने के बाद से सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर भारत को कई बार धमकाने की कोशिश की गई है। पहले बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने चीन को अपने यहां पुराने जमाने के एक एयरबेस दिखाने के बहाने बुलाकर गीदड़भभकी देने का प्रयास किया, फिर वहां के कट्टरपंथी छात्र नेताओं


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    By Azad Hind Desk जनवरी 7, 2026
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    नई दिल्ली: बांग्लादेश में अस्थिरता शुरू होने के बाद से सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर भारत को कई बार धमकाने की कोशिश की गई है। पहले बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने चीन को अपने यहां पुराने जमाने के एक एयरबेस दिखाने के बहाने बुलाकर गीदड़भभकी देने का प्रयास किया, फिर वहां के कट्टरपंथी छात्र नेताओं ने भी उसी जुबान में बोलना शुरू कर दिया। यह सब उसी दौर में शुरू हुआ है, जब चीन ने दक्षिण चीन सागर से भी आगे निकल कर बंगाल की खाड़ी में चोरी-छिपे अपनी चालबाजियां जाहिर करनी शुरू की। लेकिन, भारत ने भी अब इन नापाक इरादों की नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है।

    हल्दिया में क्यों बन रहा नेवल बेस

    बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड का मुख्यालय विशाखापत्तनम में है। नेवी का एक बेस अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी है। लेकिन, अब पश्चिम बंगाल में हल्दिया में भी एक नया बेस बनाने की तैयारी शुरू है। हल्दिया में कोस्ट गार्ड का बेस पहले से है। लेकिन, अब बांग्लादेश और म्यांमार के नजदीक नया नेवल बेस बनने से बंगाल की खाड़ी के ऊपरी क्षेत्र से भी भारत को नई सामरिक मजबूती मिलेगी। मतलब, हल्दिया में बेस बनने के बाद इंडियन नेवी यहां भी अपने अत्याधुनिक युद्धपोत हमेशा तैयार रख सकेगी।

    असम, बंगाल, बिहार में नए आर्मी कैंप

    बांग्लादेश में 2024 में लोकप्रिय सरकार को सत्ता से बेदखल करके नई सरकारी बनाई गई, जिसपर कट्टपंथियों के दबाव में काम करने के आरोप हैं। वहां जबसे भारत-विरोधी माहौल बनाने की कोशिशें शुरू हुई हैं और कभी आईएसआई और कभी चीन के नुमाइंदों की चहलकदमी बढ़ी है, भारत ने पश्चिम बंगाल, बिहार और असम जैसे नजदीकी राज्यों में भी आर्मी के नए कैंपों की स्थापना पर काम शुरू कर दिया है। इनमें असम में धुबरी जिले में लाचित बोरफुकन मिलिट्री स्टेशन, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में नए फॉरवर्ड बेस का निर्माण शामिल है।

    सेना, वायु सेना ने पहले ही चुस्त की तैनाती

    सैन्य जानकारों के अनुसार सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर चुनौतियों को देखते हुए ऐसे कदम उठाने बहुत ही जरूरी हो गए हैं। बता दें कि भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर पर सिक्किम से लेकर सिलीगुड़ी कॉरिडोर (कथित चिकन नेक कॉरिडोर) तक की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसने भी पहले से ही अपनी तैनाती को और मुस्तैद कर रखा है। यही नहीं, पास के हाशिमारा एयरबेस में राफेल जेट, ब्रह्मोस मिसाइल और एडवांस्ड एयर-डिफेंस सिस्टम भी तैनात हो चुके हैं।

    शिलॉन्ग में एयर फोर्स का ईस्टर्न एयर कमांड

    भारतीय वायुसेना का ईस्टर्न एयर कमांड मेघालय के शिलॉन्ग में पहले से ही स्थित है। इसके ऑपरेशनल दायरे में 12 राज्य आते हैं, जिनमें पूर्वोत्तर के सातों राज्य समेत, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार-झारखंड और ओडिशा के हिस्से भी शामिल हैं। इसकी जिम्मेदारी में चीन से लगी 6,300 किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), नेपाल, भूटान, म्यामांर और बांग्लादेश हैं।

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