पुराने चीता-चेतक का इस्तेमाल कब तक?
इंडियन आर्मी और एयरफोर्स लेह और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में सामान पहुंचाने और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए चीता और चेतक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती है। लेकिन पिछले कुछ सालों से कई चीता और चेतक हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुए हैं। इन्हें रिप्लेस करने की जरूरत कई सालों से बताई जा रही है लेकिन उन्हें रिप्लेस करना अब तक शुरू नहीं हुआ है।
हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH) बना रहा है लेकिन इनमें लगातार देरी हो रही है। आर्मी एविएशन के पास अभी करीब 180 चीता, चेतक और चीतल हेलिकॉप्टर हैं। इसमें से पांच 50 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और करीब 130 हेलिकॉप्टर 30 से 50 साल पुराने हैं।
इन्हें रिप्लेस करने के लिए LUH की जरूरत है। LUH को 2021 में भी इनिशियल ऑपरेशनल क्लियरेंस (IOC) मिल गया था लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से ये अब तक आर्मी और एयरफोर्स की जरूरत पूरी करने लायक नहीं बन पाया है। इसमें फिर कुछ चेंज किए जा रहे हैं।
LCA MK1-A में ही देरी नहीं मार्क-1 भी नहीं मिले पूरे
एयरफोर्स को सिर्फ फाइटर जेट LCA MK1-A (तेजस मार्क1-A) मिलने में ही देरी नहीं हो रही है बल्कि अब तक मार्क-1 (यानी तेजस का पुराना वर्जन) भी पूरे नहीं मिल पाए हैं। एयरफोर्स ने 40 एलसीए-मार्क1 (तेजस) का ऑर्डर किया था। जिसमें 32 सिंगल सीटर थे और 8 डबल सीटर यानी 8 ट्रेनर एयरक्राफ्ट थे। इसमें से कुल 38 तेजस एयरफोर्स को मिले हैं जिसमें 6 ट्रेनर हैं।
दो ट्रेनर अब भी एयरफोर्स को नहीं मिल सके हैं। ये मसला 2023 में संसद की स्टैंडिंग कमिटी के सामने भी उठा था। तब भी एयरफोर्स की तरफ से बताया गया था कि ‘40 एलएसी काफी वक्त पहले ही मिल जाने चाहिए थे लेकिन अब भी इनमें से दो नहीं मिल पाए हैं’। स्थिति अब भी वैसी ही है।












