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  • जनरल नरवणे की किताब में ऐसा क्या लिखा? जो छपने से पहले ही गरमा गई सियासत

    एक किताब में लिखी बातों को लेकर हफ्ते की शुरुआत से लोकसभा में गतिरोध जारी है। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की ऑटोबायोग्राफी के हवाले से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखना चाहते हैं। लेकिन, सरकार की दलील है कि किसी किताब के हवाले से कुछ नहीं कहा जाना


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    By Azad Hind Desk फरवरी 6, 2026
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    एक किताब में लिखी बातों को लेकर हफ्ते की शुरुआत से लोकसभा में गतिरोध जारी है। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की ऑटोबायोग्राफी के हवाले से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखना चाहते हैं। लेकिन, सरकार की दलील है कि किसी किताब के हवाले से कुछ नहीं कहा जाना चाहिए। विपक्ष को किताबी भाषा में ही जवाब देने के लिए BJP सांसद निशिकांत दुबे दर्जनों किताबों के साथ लोकसभा पहुंच गए। जनरल नरवणे की ऑटोबायोग्राफी ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ भले अभी रिलीज नहीं हुई, लेकिन इसने सरकार, विपक्ष, पब्लिक, लेखक-प्रकाशक जैसे फोर स्टार्स ऑफ पॉलिटिक्स को जन्म दे दिया है।

    मंजूरी का इंतजार

    किताब का हवाला देते हुए विपक्ष को सरकार पर पुराने आरोप दोहराने का मौका मिल गया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर होने का ऐलान किया है, राहुल गांधी तब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘सरेंडर’ करने का आरोप लगा रहे हैं। सदन में राहुल फिलहाल चीन का मसला उठा रहे हैं, लेकिन किताब में अग्निपथ पर जो लिखा है उस पर भी सवाल हैं। राहुल गांधी जिस तरह आक्रामक दिख रहे, उससे लगता है कि यह मामला जल्दी शांत होने वाला नहीं है।

    फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी

    सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा था कि अप्रकाशित किताब के हवाले से कोई भी दावा कैसे किया जा सकता है। हालांकि किताब क्यों नहीं छपी, इस पर सरकार चुप है। दिसंबर 2023 में ही पेंगुइन ने जनरल नरवणे की ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का ऐलान किया था। तब इसका प्री-ऑर्डर भी लिया जा रहा था। किताब जनवरी 2024 में ही आनी थी, लेकिन इसकी रिलीज रोक दी गई। कहा गया कि रक्षा मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली है।

    रक्षा मंत्रालय भी नहीं बता रहा है कि पूर्व सेना प्रमुख की इस किताब को क्लियरेंस कब मिलेगी और मिलेगी या नहीं। सवाल उठ रहे हैं कि रिव्यू के लिए कोई तय मियाद भी है क्या? अगर क्लियरेंस नहीं देनी है तो इसकी जानकारी लेखक और प्रकाशक को दी जाती है या नहीं, और क्या उन्हें इसकी वजह बताई जाती है?

    राहुल को कैसे मिली किताब

    संसद में चर्चा तेज हो गई कि किताब कहां और कैसे मिलेगी? राहुल जब किताब लेकर सदन पहुंचे तो पूछा जाने लगा कि उन्हें यह कहां से मिल गई? राहुल ने कहा कि आप अंदाजा लगा सकते हैं। कहा जा रहा है कि प्री-ऑर्डर के लिए किताब की प्रिंटिंग हुई थी, लेकिन रिलीज पर रोक के बाद प्री-ऑर्डर कैंसल कर दिए गए। संसद में विवाद पर अब तक न तो लेखक और न प्रकाशक ने कुछ कहा है। ऐसे में सवाल है कि 432 पन्ने की यह किताब महज राजनीतिक विवाद बन कर रह जाएगी या लोगों के हाथ भी आएगी?

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