• Business
  • जनवरी में लगेगा रूसी तेल की सप्लाई में कट, भारत ने क्यों लिया यह फैसला?

    नई दिल्ली: जनवरी में भारत को कम रूसी तेल मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीदना या तो बंद कर दिया है या इसमें बड़ी कटौती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए और ज्यादा टैक्स लगा सकता है।


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: जनवरी में भारत को कम रूसी तेल मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल खरीदना या तो बंद कर दिया है या इसमें बड़ी कटौती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए और ज्यादा टैक्स लगा सकता है। रूसी तेल में कटौती को इसी एंगल से जोड़कर देखा जा रहा है।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि जनवरी में उन्हें रूस से तेल मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे भारत का रूस से तेल आयात काफी कम हो सकता है। यह पिछले कुछ सालों में सबसे कम होगा। रिलायंस दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाती है और पिछले साल रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनी थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक्स पर एक बयान में कहा कि जामनगर रिफाइनरी को पिछले करीब तीन हफ्तों से रूस से तेल का कोई जहाज नहीं मिला है और जनवरी में भी रूस से कच्चे तेल की कोई डिलीवरी मिलने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने पिछले हफ्ते आई एक मीडिया रिपोर्ट को भी गलत बताया। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस से तेल लदे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर आ रहे थे।
    रूसी तेल का कोई टैंकर नहीं आ रहा, मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने किया इनकार

    बड़ा खरीदार बन गया था भारत

    यूक्रेन युद्ध साल 2022 में शुरू होने के बाद से भारत डिस्काउंट पर मिल रहे रूसी समुद्री तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए हैं। उनका कहना है कि तेल से होने वाली कमाई रूस को युद्ध लड़ने में मदद करती है।

    अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क को दोगुना करके 50% कर दिया था। यह भारत द्वारा रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने की सजा के तौर पर किया गया था। फिलहाल दोनों देश एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जो कभी-कभी मुश्किलों भरा रहा है।

    रिफाइनरियों से मांगा ब्योरा

    रॉयटर्स ने पिछले हफ्ते सूत्रों के हवाले से बताया था कि भारतीय अधिकारियों ने रिफाइनरियों से रूसी और अमेरिकी तेल की खरीद का साप्ताहिक ब्योरा देने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारत के रूस से तेल का आयात शायद 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे चला जाएगा। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि नई दिल्ली वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौता करना चाहती है।

    तेल आयात में कितनी गिरावट?

    अमेरिका और यूरोपीय संघ के कड़े प्रतिबंधों के कारण भारत में रूसी तेल का प्रवाह धीमा हो गया है। सूत्रों और एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार दिसंबर में यह आयात तीन साल के निचले स्तर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया था। जून में यह लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन के शिखर से लगभग 40% की गिरावट है।

    लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस के तेल खरीदना बंद करने से जनवरी में भारत में रूसी तेल की डिलीवरी केवल रूस समर्थित नायरा एनर्जी और सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्प (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्प (BPCL) तक सीमित रहने की संभावना है। सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया है कि नायरा एनर्जी शायद रूसी कच्चे तेल की मुख्य भारतीय खरीदार होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण उसके अन्य आपूर्तिकर्ता पीछे हट गए हैं और उसकी आपूर्ति बाधित हो गई है। नायरा 40 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।