रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि जनवरी में उन्हें रूस से तेल मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे भारत का रूस से तेल आयात काफी कम हो सकता है। यह पिछले कुछ सालों में सबसे कम होगा। रिलायंस दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाती है और पिछले साल रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनी थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक्स पर एक बयान में कहा कि जामनगर रिफाइनरी को पिछले करीब तीन हफ्तों से रूस से तेल का कोई जहाज नहीं मिला है और जनवरी में भी रूस से कच्चे तेल की कोई डिलीवरी मिलने की उम्मीद नहीं है। कंपनी ने पिछले हफ्ते आई एक मीडिया रिपोर्ट को भी गलत बताया। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस से तेल लदे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर आ रहे थे।
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बड़ा खरीदार बन गया था भारत
यूक्रेन युद्ध साल 2022 में शुरू होने के बाद से भारत डिस्काउंट पर मिल रहे रूसी समुद्री तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए हैं। उनका कहना है कि तेल से होने वाली कमाई रूस को युद्ध लड़ने में मदद करती है।
अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क को दोगुना करके 50% कर दिया था। यह भारत द्वारा रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने की सजा के तौर पर किया गया था। फिलहाल दोनों देश एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जो कभी-कभी मुश्किलों भरा रहा है।
रिफाइनरियों से मांगा ब्योरा
रॉयटर्स ने पिछले हफ्ते सूत्रों के हवाले से बताया था कि भारतीय अधिकारियों ने रिफाइनरियों से रूसी और अमेरिकी तेल की खरीद का साप्ताहिक ब्योरा देने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारत के रूस से तेल का आयात शायद 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे चला जाएगा। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि नई दिल्ली वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौता करना चाहती है।
तेल आयात में कितनी गिरावट?
अमेरिका और यूरोपीय संघ के कड़े प्रतिबंधों के कारण भारत में रूसी तेल का प्रवाह धीमा हो गया है। सूत्रों और एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार दिसंबर में यह आयात तीन साल के निचले स्तर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया था। जून में यह लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन के शिखर से लगभग 40% की गिरावट है।
लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस के तेल खरीदना बंद करने से जनवरी में भारत में रूसी तेल की डिलीवरी केवल रूस समर्थित नायरा एनर्जी और सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्प (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्प (BPCL) तक सीमित रहने की संभावना है। सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया है कि नायरा एनर्जी शायद रूसी कच्चे तेल की मुख्य भारतीय खरीदार होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण उसके अन्य आपूर्तिकर्ता पीछे हट गए हैं और उसकी आपूर्ति बाधित हो गई है। नायरा 40 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली रिफाइनरी चलाती है।












