इससे पहले 6 जनवरी को, जब याचिका सुनवाई के लिए आई, तो जस्टिस पीटी आशा ने मौखिक रूप से CBFC से 7 जनवरी को उस ‘शिकायत’ की एक कॉपी पेश करने के लिए कहा, जिसमें दावा किया गया था कि फिल्म ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।’ फिल्म निर्माताओं ने बताया था कि U/A सर्टिफिकेशन के लिए शुरुआती सिफारिश के बाद फिल्म को ‘रिव्यू’ के लिए भेजा गया था।
सेंसर बोर्ड ने कट्स बताए, मेकर्स ने लगाए, फिर भी रोक दी फिल्म
जानकारी के लिए बता दें कि CBFC की एक जांच कमेटी ने शुरू में फिल्म देखने के बाद कुछ कट्स और कुछ शब्दों को म्यूट करने की सिफारिश की थी। इसके साथ ही इसे U/A 16 सर्टिफिकेट देने की बात कही गई। मेकर्स ने सुझाव मानते हुए फिल्म में बदलाव भी किए। लेकिन बाद में कथित तौर पर एक शिकायत मिलने पर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया। शिकायत में कहा गया कि कुछ सीन में डिफेंस फोर्सेज को दिखाए जाने के तरीके और कुछ सीन चिंताजनक हैं, इनसे कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को लगाई फटकार
जस्टिस पीटी आशा ने अपने फैसले में सेंसर बोर्ड को फटकार भी लगाई। अदालत ने कहा, ‘सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष की चिट्ठी जो 6 जनवरी को जारी हुई, वह उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। यदि पूर्व में कमिटी द्वारा सुझाए गए बदलाव कर दिए गए हैं, तो यह अपने-आप सर्टिफिकेट पाने की हकदार बन जाती है।
थलपति विजय की आखिरी फिल्म है ‘जन नायकन’
एच विनोद के डायरेक्शन में बनी ‘जन नायकन‘ एक्टर के रूप में थलपति विजय की आखिरी फिल्म है। इसके बाद वह अपनी फुलटाइम राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं। फिल्म में उनके साथ प्रकाश राज, पूजा हेगड़े, मामिता बैजू भी हैं।
18 दिसंबर को रिव्यू के लिए भेजी गई थी फिल्म, 19 दिसंबर को मिले थे सुझाव
बताया जाता है कि फिल्म की टीम ने सारा काम पूरा करने के बाद 18 दिसंबर को इसे सेंसरशिप के लिए भेजा था। इसके बाद, 19 दिसंबर को फिल्म देखने वाले सेंसर बोर्ड ने कथित तौर पर कुछ सीन हटाने और कुछ डायलॉग्स को म्यूट करने की सलाह दी। अपनी याचिका में फिल्म प्रोडक्शन हाउस ने बताया था कि सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए बदलाव करने के बाद भी, सेंसर सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है।














