• National
  • जाकर मर जाओ; पति-पत्नी के बीच झगड़े में ऐसा कहना क्या होगा अपराध? हाई कोर्ट ने सुनाया यह फैसला

    नई दिल्ली: जाकर मर जाओ… कहकर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी व्यक्ति को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट की ओर से कहा गया कि ये शब्द गुस्से में कहे गए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए केरल हाई कोर्ट ने कहा कि झगड़े के दौरान लापरवाही से या


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 29, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: जाकर मर जाओ… कहकर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी व्यक्ति को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट की ओर से कहा गया कि ये शब्द गुस्से में कहे गए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए केरल हाई कोर्ट ने कहा कि झगड़े के दौरान लापरवाही से या गुस्से में बोले गए शब्द आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनते। अदालत ने कहा कि महत्वपूर्ण कारक आरोपी का इरादा है।

    यह मामला एक महिला और उसकी छोटी बेटी से संबंधित है, जिन्होंने कथित तौर पर उस व्यक्ति द्वारा डांटे जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। जस्टिस सी प्रदीप कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कासरगोड के बारा निवासी सफवान अधुर को बरी कर दिया, जिसके खिलाफ स्थानीय अदालत ने आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और धारा 204 के तहत साक्ष्य नष्ट करने का आरोप तय किया था।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार अधुर का एक विवाहित महिला के साथ संबंध था। जब मृतका को पता चला कि वह किसी दूसरी महिला से शादी करने की योजना बना रहा है, तो उसने इस बारे में सवाल किया और दोनों के बीच बहस हुई। इस दौरान उसने कथित तौर पर उसे चली जा और मर जा कहा।

    15 सितंबर, 2023 को महिला और उसकी साढ़े पांच वर्षीय बेटी ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद कासरगोड के मेलपरम्बा पुलिस स्टेशन ने अधुर के खिलाफ मामला दर्ज किया। कासरगोड की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने अधुर की बरी होने की याचिका खारिज कर दी और उसके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला किया।

    न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में ‘चली जा और मर जा’ शब्द मौखिक बहस के दौरान, आवेश में आकर कहे गए थे, मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई इरादा नहीं था। इसलिए आईपीसी की धारा 306 के तहत अपराध नहीं बनता है। न्यायालय ने आगे कहा कि चूंकि आरोपों से आईपीसी की धारा 306 के तहत कोई अपराध नहीं बनता, इसलिए आईपीसी की धारा 204 के तहत आरोप भी मान्य नहीं होगा। हाई कोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को पलट दिया।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।