पीएम मोदी ने क्या कहा
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान मैंने लाल किले से ‘पंच-प्राण’ की बात की थी। उनमें से एक है गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रतीकों को महत्व देने लगा है। हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ने राजगोपालाचारी के सार्वजनिक जीवन में योगदान पर भी प्रकाश डाला।
सी. राजगोपालाचारी को लेकर ये बोले प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने बताया कि राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे उन लोगों में से थे जो सत्ता को पद नहीं बल्कि सेवा मानते थे। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, संयम और स्वतंत्र सोच आज भी हमें प्रेरित करती है। आजादी के बाद भी औपनिवेशिक काल के प्रतीकों के बने रहने पर खेद व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां दशकों तक राष्ट्रपति भवन परिसर में बनी रहीं, जबकि स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रतीकों को वैसी मान्यता नहीं मिली।
एडविन लुटियंस की जगह राजाजी की प्रतिमा
पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से, आजादी के बाद भी, ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियों को राष्ट्रपति भवन में रहने की अनुमति दी गई, लेकिन देश के महानतम सपूतों की मूर्तियों को जगह देने से इनकार कर दिया गया। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की एक प्रतिमा भी थी। अब, इस प्रतिमा के स्थान पर राजाजी की प्रतिमा लगाई जाएगी।
एक मार्च तक चलेगी प्रदर्शनी
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रोताओं को आगे बताया कि राजाजी उत्सव समारोह के अंतर्गत सी. राजगोपालाचारी को समर्पित एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 24 फरवरी से 1 मार्च तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे राजगोपालाचारी के जीवन और विरासत के बारे में अधिक जानने के लिए जब भी संभव हो प्रदर्शनी का दौरा करें।
कौन थे चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
- चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर, 1878 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था।
- राजगोपालाचारी वकील और बुद्धिजीवी थे। उन्होंने अपनी वकालत छोड़ दी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए।
- बाद में सी राजगोपालाचारी ने अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलनों में हिस्सा लिया।
- सी राजगोपालाचारी ‘राजाजी’ ने विशेष रूप से रॉलेट एक्ट के खिलाफ विरोध, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में हिस्सा लिया।
- 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ तो वो स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम गवर्नर-जनरल थे।
- 1950 में भारत के गणतंत्र बनने के बाद यह पद समाप्त कर दिया गया था, सी राजगोपालाचारी महात्मा गांधी के समधी थे।
- चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को फिर मद्रास से कांग्रेस के टिकट पर संविधान सभा के लिए चुना गया था।
- वे अल्पसंख्यकों पर बनी उप-समिति का हिस्सा थे। उन्हें 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
- राजगोपालाचारी 1947-48 तक पश्चिम बंगाल के पहले गवर्नर भी रहे, जब बंगाल प्रांत को दो भागों में बांटा गया था।













