सचिन अवस्थी ने बताया है कि वह अपनी पत्नी के साथ बीते साल दिसंबर के आखिर में छुट्टियां मनाने जेजू आइलैंड पर उतरे थे। वह तब हैरान रह गए, जब उनको एंट्री नहीं दी गई। उनको रात भर एक होल्डिंग फैसिलिटी में रखा गया और आखिर में डिपोर्ट कर दिया गया। उन्होंने करीब 36 घंटे तक हिरासत में रहने की बात कही है।
अधिकारियों का अनुभव बहुत खराब था
सचिन अवस्थी ने कहा है कि जेजू में उन्होंने बहुत खराब अनुभव किया। सचिन ने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने बिना रिटर्न टिकट या बुकिंग चेक किए उन्हें रिजेक्ट कर दिया और जेल जैसे एक कमरे में उनको डाल दिया गया। सचिन ने गुस्सा निकालते हुए कहा कि एंट्री से मना करना उनका अधिकार है लेकिन उनका बर्ताव बहुत खराब था।
सचिन अवस्थी ने अपने वीडियो में कहा कि इमिग्रेशन पर अफसरों ने उनके इंडियन पासपोर्ट देखे, फिंगरप्रिंट लिए और उन्हें वेटिंग एरिया में ले गए। हमें डिटेल्ड फॉर्म दिए गए और फोन इंटरप्रेटर के जरिए इंटरव्यू लिया गया। इसके बाद हमें उन्हें बेसिक खाना देकर एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया और वापसी की फ्लाइट तक आने-जाने पर रोक लगा दी गई।
दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
साउथ कोरिया में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि साउथ कोरिया की वीजा वेवर स्कीम के तहत जेजू आइलैंड जाने वाले इंडियन नागरिकों को दिकक्त हो सकती है। एडवाइजरी में कहा गया है कि यह सुविधा मेनलैंड कोरिया में आगे की यात्रा की इजाजत नहीं देती है। यह द्वीप पर एंट्री की गारंटी नहीं देती है।
एम्बेसी ने अपने बयान में जेजू वीजा फ्री एंट्री के दायरे को साफ करते हुए बताया कि वीजा वेवर स्कीम का दायरा बहुत सीमित है और यह साउथ कोरिया के इमिग्रेशन अधिकारियों की मर्जी पर निर्भर है। ऐसे में वीजा वेवर स्कीम के तहत जेजू आइलैंड जाने की योजना बना रहे इंडियन नागरिकों को इन बातों का ध्यान रखना होगा।













