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  • जोगिंदर सिंह निकला योगिंदर सिंह, 26 साल बाद दिल्ली पुलिस ने दबोचा फरार हत्यारा

    एक आम दिखने वाला इंसान क्या कुछ हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। लुधियाना में सालों से रह रहा आम बढ़ई जिसे सब जोगिंदर सिंह के नाम से जानते थे वो असल में निकला योगिंदर सिंह। नई दिल्ली और लुधियाना के बीच फैली यह कहानी ऐसे शख्स की है, जिसने 26 सालों तक


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    एक आम दिखने वाला इंसान क्या कुछ हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। लुधियाना में सालों से रह रहा आम बढ़ई जिसे सब जोगिंदर सिंह के नाम से जानते थे वो असल में निकला योगिंदर सिंह। नई दिल्ली और लुधियाना के बीच फैली यह कहानी ऐसे शख्स की है, जिसने 26 सालों तक अपनी असली पहचान छुपाकर आम जिंदगी जी। लुधियाना में पड़ोसी उसे एक आम, सीधे-साधे बढ़ई की तरह जानते थे, जो कम बोलता था, चुनावों में वोट डालता था और पंजाबी ऐसे बोलता था जैसे वहीं का रहने वाला हो।

    लेकिन सोमवार को यह नकाब ऐसा उतरा कि कोई भरोसा भी नहीं कर पाया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जब उसके घर पहुंची, तो सामने आया कि 58 साल का जोगिंदर सिंह असल में योगिंदर सिंह है, जिसने 1992 में दिल्ली में अपनी पत्नी की हत्या की थी और फिर पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार हो गया था।

    1992 में पत्नी का गला घोंटकर की थी हत्या

    15 मार्च 1992 की सुबह साउथ-वेस्ट दिल्ली के पिलांगी गांव में एक किराए के मकान में महिला की लाश मिली थी। शव गद्दे पर पड़ा था और गला घोंटकर हत्या की गई थी। मकान मालिक के भाई ने योगिंदर को थोड़ी दूरी तक पीछा कर पकड़ लिया था, जब वह भागने की कोशिश कर रहा था। योगिंदर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला था और साउथ दिल्ली की एक फर्नीचर दुकान में काम करता था।

    1997 में मिली उम्रकैद की सजा

    1997 में अदालत ने उसे पत्नी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। जून 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे चार हफ्ते की पैरोल दी, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। इसके बाद वह लगातार अपनी जगह बदलता रहा और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों से लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल के गांवों तक घूमता रहा। हर राज्य में वह दो से तीन साल रुकता था और फिर आगे बढ़ जाता था, आखिर में वह कर्नाटक पहुंचा।

    2012 से रह रहा था पंजाब में

    2012 में उसने पंजाब में बसने का फैसला किया। यहां उसने अपनी नई पहचान बनाई और योगिंदर से जोगिंदर सिंह बन गया। उसने अपने पिता का नाम जय प्रकाश से बदलकर जयपाल कर लिया, पंजाबी भाषा में पूरी तरह दक्ष हो गया और नए नाम से आधार कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा ली। इसके बाद करीब 14 साल तक वह एक आम बढ़ई की तरह जिंदगी जीता रहा और उसे लगने लगा था कि उसका पुराना अतीत हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।

    अंडरकवर रहकर पकड़ा अपराधी

    लेकिन दिल्ली पुलिस उसकी तलाश में लगातार लगी रही। एक टिप के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और पंजाब में 500 से ज्यादा लोगों की पहचान की जांच की। पिछले साल दिसंबर के आखिर में पुलिस की एक टीम ने 10 दिन तक लुधियाना में अंडरकवर रहकर उस शख्स पर नजर रखी, जिसका हुलिया आरोपी से मिलता था, लेकिन नाम अलग था। 5 जनवरी को जब पुलिस ने कार्रवाई की, तो योगिंदर को शक हो गया और वह मोटरसाइकिल से भागने लगा। भीड़भाड़ वाले इलाके में तेज रफ्तार पीछा करने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया। अब उसे दोबारा तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जहां वह अपनी उम्रकैद की सजा पूरी करेगा।

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