क्यों बदला गया फैसला?
आईसीसी के सूत्रों के अनुसार, टूर्नामेंट के कार्यक्रम में बदलाव और बांग्लादेश टीम की अनुपस्थिति के कारण अनुरोधों की संख्या और प्राथमिकताओं में बदलाव आया है। पहले लगभग 80-90 पत्रकारों ने आवेदन किया था, जबकि देश कोटे के तहत अधिकतम सीमा 40 थी। अब चूंकि बांग्लादेश इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं है, इसलिए आईसीसी कोटे के बजाय व्यक्तिगत योग्यता और आवश्यकता के आधार पर ही पत्रकारों को अनुमति देगा।
BCB ने मांगा स्पष्टीकरण
ढाका में इस फैसले के बाद हड़कंप मच गया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के मीडिया अधिकारी अमजद हुसैन ने कहा कि बोर्ड ने आईसीसी से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने इसे एक आंतरिक और गोपनीय मामला बताते हुए कहा कि बोर्ड जानना चाहता है कि आवेदनों को अचानक अस्वीकार क्यों किया गया। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने आईसीसी के इस फैसले पर हैरानी जताई है। एक पत्रकार ने बताया, ‘मैंने 8-9 विश्व कप कवर किए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब मेरा आवेदन खारिज हुआ है।’ बांग्लादेशी मीडिया अब दोबारा आवेदन करने से पहले अपने बोर्ड (BCB) के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
घटना का बैकग्राउंड
आईसीसी के मूल्यांकन के मुताबिक भारत में बांग्लादेशी टीम को कोई सुरक्षा खतरा नहीं था, लेकिन इसके बावजूद बीसीबी ने टीम भेजने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल कर लिया है। 7 फरवरी से शुरू हो रहे इस मेगा इवेंट में अब बांग्लादेश की कोई आधिकारिक भागीदारी नहीं होगी। यह घटना दर्शाती है कि बोर्ड के फैसले का असर न केवल खिलाड़ियों पर, बल्कि खेल को कवर करने वाले मीडिया कर्मियों पर भी पड़ा है। आईसीसी की इस सख्त कार्रवाई से बांग्लादेशी पत्रकार अब विश्व कप की कवरेज से बाहर होने की कगार पर हैं।













