ईरान पर बमबारी से पटरी से उतर जाएगा समझौता
ईरान पर करीबी नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत के बीच देश पर बमबारी से परमाणु डील पटरी से उतर सकती है। इससे बदले की कार्रवाई का एक खतरनाक सिलसिला भी शुरू हो सकता है। इलाके के एक सीनियर सरकारी अधिकारी के मुताबिक, अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान शायद बातचीत में हिस्सा लेना रोक देगा। इससे अमेरिका के लिए ईरान पर दबाव बनाना और मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका को भारी पड़गा ईरान पर हमला
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए वॉशिंगटन में स्टिमसन सेंटर की फेलो बारबरा स्लाविन ने कहा, “अगर वह ईरानियों पर दोबारा हमला करते हैं तो उन्हें उनसे कोई डिप्लोमैटिक एग्रीमेंट नहीं मिलेगा।” सिर्फ मिलिट्री धमकियां – भले ही अमेरिका उन पर आखिरकार कोई एक्शन न ले – “उन्हें डील करने के लिए कम तैयार कर देंगी।” हालांकि ट्रंप ने 10 से 15 दिनों की डेडलाइन दी है, लेकिन यह भी साफ नहीं है कि एयर स्ट्राइक का नया राउंड असल में क्या हासिल करेगा।
2025 की बमबारी से उबर गया ईरान?
अमेरिका और इजरायल ने जून 2025 में ईरान के परमाणु सुविधाओं और एयर डिफेंस पर बड़े पैमाने पर बमबारी की थी। उस समय ट्रंप ने कहा था कि ईरान की जरूरी न्यूक्लियर एनरिचमेंट फैसिलिटी को पूरा तरह तबाह कर दिया गया है। तब ऐसी उम्मीद जताई गई थी कि ईरान को दोबारा अपने परमाणु कार्यक्रम को पटरी पर लाने में कम से कम 5 साल का वक्त लगेगा, लेकिन चंद महीने के अंदर ईरान ने फिर से दिखा दिया है कि वह इस बमबारी से पूरी तरह उबर चुका है।
ईरान पर हमले से भारत की परेशानी कैसे बढ़ सकती है?
ईरान पर हमला होता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा। ईरान ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला होता है तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई रूट होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। भारत के कच्चे तेल का लगभग आधा और प्राकृतिक गैस का 60% आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यह समुद्री मार्ग बंद होता है तो भारत के लिए ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। इससे न सिर्फ भारत में तेल और गैस का दाम बढ़ेगा, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेबों पर होगा। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी।













