पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘मेरी जानकारी है कि चीन का नेतृत्व पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में था। मई में 6 से 10 तारीख तक यानी सैन्य संघर्ष के समय और इसके बाद भी बीजिंग ने भारतीय नेतृत्व के साथ संपर्क किया। यह संपर्क क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति और सुरक्षा लाने में अहम साबित हुए। ऐसे में मध्यस्थता के बारे में चीन का बयान सही है।’
चीन का दावा सही: पाकिस्तान
ताहिर अंद्राबी ने आगे कहा, ‘पाकिस्तान की राय और आकलन है कि चीन की कूटनीति शांति के लिए थी। यह समृद्धि, सुरक्षा के लिए कूटनीति थी। इससे संघर्ष को सुलझाने में किए गए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की एक पहचान बनी। इसलिए हम इस मामले पर चीन के विदेश मंत्री की ओर से बताए गए रुख का समर्थन करते हैं।’
चीन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ये दावा कर चुके हैं कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान की लड़ाई खत्म कराई। ट्रंप की ओर से कम से कम 50 दफा अलग-अलग मंचों से ये कहा जा चुका है कि उन्होंने टैरिफ लगाने की धमकी देकर पाकिस्तान और भारत को सीजफायर के लिए मना लिया था।
पाकिस्तान खुद फंस गया
भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का पहले अमेरिका और अब चीन श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है। भारत जहां तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारता है तो वहीं पाकिस्तान सबको कबूल रहा है। पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को भी ‘शांति पुरुष’ करार दिया है और अब चीन का भी समर्थन कर दिया है।
अमेरिका और चीन, दोनों का समर्थन करने से पाकिस्तान के बयानों की सत्यता और ज्यादा शक के दायरे में आ जाती है। पाकिस्तान के ऑपरेशन सिंदूर के समय किए गए दावों पर पहले से ही सवाल हैं। अब चीन, अमेरिका और सभी देशों की हां में हां वह मिला रहा है। इससे पता चलता है कि उसका कोई स्टैंड नहीं है।













