शी जिनपिंग सबसे शक्तिशाली
दावोस में इंडिया टुडे के साथ एक बातचीत में ब्रेमर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप नहीं बल्कि चीन के शी जिनपिंग दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता हैं। उनकी इसकी वजह बताते हुए कहा कि शी जिनपिंग के पास मिडटर्म चुनाव नहीं होते। उनके पास स्वतंत्र न्यायपालिका नहीं है। ट्रंप तीन साल बाद वहां नहीं होंगे। शी जिनपिंग होंगे। इसलिए शी जिनपिंग कई मामलों में नेता के तौर पर बेहतर स्थिति में हैं।
पीएम मोदी को बताया ट्रंप से बेहतर
ब्रेमर ने पीएम मोदी को भी ट्रंप से बेहतर स्थिति में बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लंबा कार्यकाल उन्हें ट्रंप या कई अन्य यूरोपीय नेताओं के मुकाबले ज्यादा आक्रामक तरीके से सुधारों को आगे बढ़ाने का मौका देता है। ब्रेमर ने कहा, ‘एक नेता के तौर पर लंबे समय तक बने रहने से मोदी कई यूरोपीय नेताओं की तुलना में ज्यादा असरदार तरीके से जवाब दे पाते हैं। हमने पिछले कुछ समय में यह देखा है।’
ट्रंप के किए काम हो सकते हैं खत्म
ब्रेमर ने कहा कि ट्रंप का कार्यकाल स्वाभाविक रूप से सीमित है और उनके बाद आने वाला राष्ट्रपति उनके कई कामों को खत्म कर सकता है। जैसा ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती बाइडन के साथ किया था। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिकी नेतृत्व में हर चार साल में बदलाव से सरकारी उपायों की निरंतरता प्रभावित होती है। इससे नतीजे आने में समय लगता है।
ट्रंप के राज में अमेरिका पर घटा भरोसा
ब्रेमर ने यह आकलन ऐसे समय में पेश किया है जब राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों ने अमेरिका के दशकों पुराने सहयोगियों को असहज कर दिया है। ट्रंप ने हाल के दिनों में ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने को लेकर आक्रामक बयानबाजी की है जिससे नाटो सहयोगियों के साथ तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। डोनाल्ड ट्रंप के चलते अब पुराने दोस्त भी अमेरिका पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। इस बीच गुरुवार को ट्रंप ने दावोस में बोर्ड ऑफ पीस की साइनिंग सेरेमनी का आयोजन किया। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस असल में संयुक्त राष्ट्र को कमजोर करने के लिए लाया गया है।














