इस डॉक्यूमेंट का पहला वाक्य ही कहता है कि “बहुत लंबे समय से अमेरिकी सरकार ने अमेरिकियों और उनके ठोस हितों को पहले रखने को नजरअंदाज किया, यहां तक कि इसे खारिज भी कर दिया।” लेकिन नया ब्लूप्रिंट वॉशिंगटन के नजरिए से राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के मामले में चीन के खतरे को भी कम करके आक रहा है। ट्रंप प्रशासन का ये पॉलिसी बुकलेट, चीन को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक स्थापित ताकत के रूप में देखती है जिसे सिर्फ अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हावी होने से रोकने की जरूरत है। चीन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने जो लक्ष्य बनाए हैं, उसमें कहा गया है कि उनका लक्ष्य “चीन पर हावी होना नहीं है, न ही उन्हें दबाना या अपमानित करना है”।
ट्रंप प्रशासन की नेशनल डिफेंस स्ट्रैटजी डॉक्यूमेंट क्या है?
यह डॉक्यूमेंट डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के फोकस को पूरी दुनिया के बजाय पश्चिमी गोलार्ध पर मजबूत करता है। इसका मतलब है कि ट्रंप प्रशासन के ‘अमेरिका फर्स्ट’ प्लान से सबसे ज्यादा दिक्कत सहयोगियों को ही होने वाली है। ट्रंप प्रशासन के इस स्ट्रैटजी को ‘डॉनरो डॉक्ट्रिन’ कहा गया है और उसी की तर्ज पर, इस रणनीति प्लान में एशिया पर फोकस कम करते हुए दक्षिण अमेरिका पर ज्यादा जोर देने की बात कही गई है। बहुत आसान शब्दों में समझें तो ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य चीन से टकराना नहीं है और उससे भी आसान शब्दों में समझें, तो ट्रंप प्रशासन ने चीन को एशिया का बॉस मान लिया है। इसके अलावा इस स्ट्रैटजी में कहा गया है कि अमेरिका का ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ यानि रक्षा मंत्रालय “ग्रीनलैंड और पनामा नहर सहित प्रमुख इलाकों तक अमेरिकी सेना और कमर्शियल पहुंच की गारंटी देने के लिए भरोसेमंद विकल्प” देगा।
हालांकि इसमें कनाडा जैसे पार्टनर्स के साथ सहयोग पर जोर दिया गया है, लेकिन चेतावनी भी दी गई है कि उन्हें “हमारे साझा हितों की रक्षा के लिए अपना हिस्सा निभाना होगा”। आपको बता दें कि इस हफ्ते दावोस में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच का विवाद और बढ़ गया है। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर मार्क कार्नी चीन के साथ कोई व्यापारिक समझौता करते हैं तो अमेरिका, कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। यह नया सिद्धांत “अमेरिका फर्स्ट” पर जोर देता है, जो वाइट हाउस की विदेश में हस्तक्षेप न करने की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी का समर्थन करता है। आपको बता दें कि US की नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी आखिरी बार 2022 में जो बाइडेन के प्रशासन में पब्लिश हुई थी। जिसमें चीन को अमेरिका के लिए “सबसे बड़ी चुनौती” के तौर पर फोकस किया गया था। लेकिन ट्रंप प्रशासन में फोकस चीन से हटता दिखाई दे रहा है और इसीलिए समझा जा सकता है, कि ट्रंप ने भारत और अमेरिका के संबंध क्यों खराब कर दिए हैं।














