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  • ट्रेड वॉर में अमेरिका से चार कदम आगे चल रहा चीन, ट्रंप की आहट भी भांप लेता है ड्रैगन, भारत पर क्या असर?

    नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के दोबारा से राष्ट्रपति बने हैं, उन्होंने दुनिया के खिलाफ ट्रेड वॉर छेड़ दिया है। एक ऐसा वॉर जिसमें उन्होंने भारत और चीन समेत कई देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाया। बाद में कुछ शर्तों के साथ ट्रंप ने ट्रेड डील की और टैरिफ में ढील दी। लेकिन


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    By Azad Hind Desk फरवरी 19, 2026
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    नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के दोबारा से राष्ट्रपति बने हैं, उन्होंने दुनिया के खिलाफ ट्रेड वॉर छेड़ दिया है। एक ऐसा वॉर जिसमें उन्होंने भारत और चीन समेत कई देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाया। बाद में कुछ शर्तों के साथ ट्रंप ने ट्रेड डील की और टैरिफ में ढील दी। लेकिन इस ट्रेड वॉर में चीन अमेरिका पर भारी पड़ गया। ट्रंप के टैरिफ के बीच चीन ऐसी कई डील करने की दिशा में बढ़ रहा है जो अमेरिका के लिए मुसीबत बन सकती हैं।

    टाइम्स नाउ के मुताबिक चीन चुपचाप 20 नए व्यापारिक समझौते करने, अपने सहयोगियों को मजबूत करने और एक ऐसी बहुपक्षीय व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में अमेरिका के दबाव का सामना कर सके। चीन को लगता है कि ट्रंप के टैरिफ ने उसे एक अनपेक्षित मौका दिया है। चीनी नेता इसे अपनी अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के बजाय, वैश्विक व्यापार को इस तरह से बदलने का अवसर देख रहे हैं, जिससे चीन की 19 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था भविष्य में अमेरिकी दबाव से सुरक्षित रह सके।
    दिखने लगे हैं अमेरिका से ट्रेड डील के साइड इफेक्ट, टैरिफ में छूट की भारी कीमत वसूल रहे ट्रंप!

    लंबी रणनीति बना रहा चीन

    दुनिया भर में चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, बाजार तक सीमित पहुंच और कमजोर घरेलू मांग को लेकर चिंताएं होने के बावजूद, बीजिंग आगे बढ़ने के लिए दृढ़ संकल्पित दिख रहा है।

    रॉयटर्स ने साल 2017 के बाद से चीनी भाषा में लिखे गए 100 लेखों की समीक्षा की है, जो सरकारी-समर्थित व्यापार विद्वानों द्वारा लिखे गए थे। इससे पता चलता है कि चीन के सलाहकार अमेरिकी व्यापार रणनीति का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर रहे थे। उनका लक्ष्य था- वाशिंगटन की ‘रोकथाम’ की रणनीति को समझना और उसका मुकाबला करने के तरीके डिजाइन करना। अब, चीन उन विचारों को अमल में ला रहा है।

    अमेरिका से आगे ड्रैगन

    रॉयटर्स ने चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (CASS) और पेकिंग यूनिवर्सिटी द्वारा समर्थित 2000 से अधिक व्यापार रणनीति पत्रों की समीक्षा की है। इससे पता चलता है कि चीन के कई नीति विशेषज्ञ वैश्विक व्यापार में दीर्घकालिक प्रभुत्व हासिल करने के लिए अल्पकालिक आर्थिक दर्द को स्वीकार करने को तैयार हैं। इन पत्रों की सामग्री पहली बार सामने आ रही है।

    दो पश्चिमी राजनयिकों ने रॉयटर्स को बताया कि यदि चीन सफल होता है, तो वह एक दशक से अधिक समय की अमेरिकी व्यापार नीति को उलट सकता है और खुद को एक नई, चीन के नेतृत्व वाली बहुपक्षीय व्यवस्था के केंद्र में स्थापित कर सकता है। ब्रूगल थिंक टैंक की वरिष्ठ फेलो एलिसिया गार्सिया हेरेरो ने कहा, ‘चीनी लोगों के पास अब एक सुनहरा अवसर है।’

    भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    चीन की इस रणनीति का असर भारत पर भी दिखाई दे सकता है। ट्रंप के टैरिफ के बाद भारत और चीन के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी हैं। टैरिफ के बाद चीन ने भारतीय सामान के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे। वहीं भारत भी अब चीन के लिए एफडीआई से लेकर सरकारी ठेकों तक के दरवाजे खोलने के विचार कर रहा है।

    ऐसे में चीन भारत में फिर से अपना निर्यात बढ़ा सकता है। हालांकि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के लिए कुछ चिंता की बात हो सकती है। वहीं दूसरी ओर कई भारतीय कंपनियां कह चुकी हैं कि बेहतर प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन का साथ जरूरी है। ऐसे में चीन की ट्रेड से जुड़ी लंबी सोच भारत के लिए फायदेमंद हो सकती है और भारत अमेरिका पर अपनी निर्भरता घटा सकता है।

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