न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इंटर-स्टेट टेरर नेटवर्क का पता सबसे पहले बीते साल 19 अक्टूबर को तब चला जब श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बनपोरा में दीवारों पर जैश ए मोहम्मद के पोस्टर लगे। श्रीनगर पुलिस ने केस दर्ज किया और CCTV फुटेज को एनालाइज किया, जिससे तीन लोकल लोगों- आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ, और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को अरेस्ट किया गया। इन सभी पर पहले भी पत्थरबाजी के केस दर्ज थे।
उनसे पूछताछ के बाद शोपियां के एक पूर्व पैरामेडिक से इमाम बने मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसी पर पोस्टर सप्लाई किए गए थे और उसने डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाने के लिए अपनी पहुंच का इस्तेमाल किया।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे
जांच करने वालों को बाद में पता चला कि आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल गनी, उमर-उन-नबी और अदील राथर अपने भाई मुजफ्फर राथर (फरार), मौलवी इरफान, कारी आमिर और तुफैल गाजी के साथ अप्रैल 2022 में श्रीनगर के डाउनटाउन में ईदगाह में मिले थे। इस मीटिंग के दौरान, उन्होंने आतंकी संगठन ‘अंसार इंटरिम’ बनाने का फैसला किया, जिसमें अदील को ‘अमीर’ (चीफ), मौलवी इरफान को ‘डिप्टी अमीर’ और गनी को ट्रेजरर बनाया गया।
- उन्होंने यह भी बताया कि आतंकवादी समूहों में ‘अंसार’ को आमतौर पर विश्व स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा से जोड़ा जाता है।
- अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों और उपदेशकों ने पूछताछ करने वालों को बताया कि सक्रिय आतंकवादियों से उनके सभी संपर्क टूट जाने के कारण एक नया समूह बनाने की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
- बैठक के दौरान सदस्यों को भूमिकाएं और ‘कोड’ सौंपे गए। उमर ने समन्वयक की भूमिका संभाली और गनी के साथ मिलकर वित्त व खरीद का काम संभाला। साल 2023 में समूह ने हरियाणा के सोहना और नूंह क्षेत्रों से उर्वरक खरीदने का निर्णय लिया। उमर के निर्देश पर, फरीदाबाद की रसायन की एक दुकान से एनपीके (जिसे इस संदर्भ में आमतौर पर पोटेशियम नाइट्रेट के नाम से जाना जाता है) भी खरीदा गया।
- पूछताछ के दौरान, गिरफ्तार डॉक्टरों ने बताया कि उमर ने साधारण आईईडी का निर्माण सीखने के लिए ऑनलाइन वीडियो देखने शुरू किए थे और वह ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) तैयार करने में कामयाब रहा था, जो सबसे प्रमुख पेरोक्साइड विस्फोटकों में से एक है। अधिकारियों के अनुसार, अदील ने नए आतंकी समूह के लिए सदस्यों की तलाश शुरू कर दी थी और दक्षिण कश्मीर के दानिश उर्फ जसीर नामक एक व्यक्ति को अपने समूह में शामिल कर लिया था।
- अदील दानिश को फरीदाबाद में अल-फलाह विश्वविद्यालय में किराए के एक आवास में ले गया, जहां दोनों ने उमर और गनी को टीएटीपी विस्फोटक सामग्री तैयार करते हुए देखा। बाद में उमर ने दानिश को ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमला करने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन दानिश ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस विश्वास का हवाला देते हुए अंतिम क्षण में अपना इरादा बदल दिया कि इस्लाम में आत्महत्या निषिद्ध है।
- पुलवामा के 28 वर्षीय डॉक्टर उमर को कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले एक नेटवर्क का सबसे कट्टरपंथी सदस्य और प्रमुख संचालक माना जाता है। सबूतों से पता चलता है कि उसकी मूल योजना राष्ट्रीय राजधानी या किसी धार्मिक महत्व के स्थल पर भीड़भाड़ वाली जगह पर एक वीबीआईईडी (व्यापक रूप से घातक विस्फोट करने वाला बम) रखने और फिर भाग जाने की थी।
- हालांकि, यह साजिश उस समय विफल हो गई जब श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के चलते गनी की गिरफ्तारी हुई और विस्फोटक बरामद किए गए। इससे उमर संभवतः घबरा गया और अंततः लाल किले के बाहर समय से पहले विस्फोट कर दिया। 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके बुनपोरा, नौगाम में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के पोस्टर दिखाई देने की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटना के बाद इस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था।
- श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की पड़ताल की, जिसके आधार पर तीन स्थानीय निवासियों आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ पहले पथराव के मामले दर्ज थे।
- उनसे पूछताछ के बाद चिकित्सा कर्मी से मौलवी बने शोपियां के निवासी मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया, जिस पर पोस्टर उपलब्ध कराने और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने का आरोप है।













