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  • डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 300 प्रवासियों को डिपोर्ट करने पर खर्च किए 40 मिलियन डॉलर, रिपोर्ट में खुलासा

    वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 300 प्रवासियों को दूसरे देशों में डिपोर्ट करने के लिए करीब 40 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। सीनेट फॉरेन रिलेशन कमेटी के डेमोक्रेटिक स्टाफ ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। रिपोर्ट कहती है कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका से इमिग्रेंट को जल्दी निकालने


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    By Azad Hind Desk फरवरी 13, 2026
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    वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 300 प्रवासियों को दूसरे देशों में डिपोर्ट करने के लिए करीब 40 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। सीनेट फॉरेन रिलेशन कमेटी के डेमोक्रेटिक स्टाफ ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। रिपोर्ट कहती है कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका से इमिग्रेंट को जल्दी निकालने के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेज अभियान चलाए। इससे इस प्रक्रिया का खर्च काफी बढ़ गया।

    अमेरिकी सीनेटर जीन शाहीन के नेतृत्व वाली फॉरेन रिलेशंस पैनल के डेमोक्रेट ने रिपोर्ट में तीसरे देशों से डिपोर्टेशन की प्रैक्टिस की आलोचना करते हुए इसे महंगा, बेकार और खराब मॉनिटरिंग वाला बताया है। रिपोर्ट में इस पॉलिसी की गंभीरता से जांच की मांग की गई है, जो बिना किसी सोच समझ के अंधेरे में चल रही है।

    डिपोर्ट में तीसरे देशों को शामिल करने पर सवाल

    रिपोर्ट में पाया गया कि माइग्रेंट को उन देशों में डिपोर्ट करने के लिए पांच देशों- इक्वेटोरियल गिनी, रवांडा, अल सल्वाडोर, इस्वातिनी और पलाऊ को 4.7 मिलियन से 7.5 मिलियन डॉलर के बीच एकमुश्त पेमेंट किया गया। अल सल्वाडोर को पिछले साल मार्च में 250 वेनेजुएलाई नागरिक मिले, जबकि दूसरे देशों को बहुत कम डिपोर्टी मिले।

    रिपोर्ट में जिन देशों की जांच की गई है, वे ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के तीसरे देशों में माइग्रेंट को डिपोर्ट करने के कुल काम का बस एक छोटा सा हिस्सा हैं। एपी ने इंटरनल एडमिनिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट में पाया कि 47 तीसरे देशों के एग्रीमेंट बातचीत के अलग-अलग स्टेज पर हैं। इनमें से 15 पूरी हो चुकी हैं और 10 से लगभग पूरी होने वाली हैं।

    यह एक लापरवाही वाला तरीका

    इमिग्रेशन एडवोकेसी ग्रुप्स ने खासतौर से थर्ड कंट्री पॉलिसी की आलोचना करते हुए इसे एक लापरवाही वाला तरीका बताया है। डेमोक्रेट्स ने इस पॉलिसी की कमी बताते हुए माइग्रेंट्स को तीसरे देश में डिपोर्ट किए जाने के कई मामलों की डिटेल दी गई है। इसमें यूएस को माइग्रेंट को उनके होम कंट्री वापस भेजने के लिए फ्लाइट का पेमेंट करना पड़ता है।

    जीन शाहीन ने उदाहरण देते हुए इक्वेटोरियल गिनी को भेजे गए 7.5 मिलियन डॉलर के पेमेंट पर सवाल उठाया है। यह उस समय हुआ, जब ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन वहां के वाइस प्रेसिडेंट टियोडोरो टेडी न्गुएमा ओबियांग से रिश्ते बना रहा था। वह करप्शन के आरोपों के चलते बदनाम हैं। उनकी खर्चीली लाइफस्टाइल ने कई देशों के प्रॉसिक्यूटर्स का ध्यान खींचा है।

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