राष्ट्रपति लाई ने कहा कि अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया तो बीजिंग “और ज्यादा आक्रामक हो जाएगा जिससे इंडो-पैसिफिक में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और नियमों पर आधारित इंटरनेशनल ऑर्डर कमजोर हो जाएगा।” लाई ने मंगलवार को ताइपे में प्रेसिडेंशियल ऑफिस बिल्डिंग में एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान AFP को बताया कि “अगर ताइवान पर चीन कब्जा कर लेता है तो चीन की विस्तारवादी इच्छाएं यहीं नहीं रुकेंगी।” उन्होंने कहा कि “अगले खतरे में आने वाले देश जापान, फिलीपींस और इंडो-पैसिफिक रीजन के दूसरे देश होंगे, जिसके नतीजे आखिरकार अमेरिका और यूरोप तक पहुंचेंगे।”
ताइवान के राष्ट्रपति की चीन को लेकर चेतावनी
आपको बता दें कि पिछले साल, जापानी PM साने ताकाइची ने बीजिंग में तब हंगामा खड़ा कर दिया था जब उन्होंने कहा था कि “अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो टोक्यो मिलिट्री दखल दे सकता है।” इससे पहले 2021 में चीनी वेबसाइट सोहू पर छपे एक OPED में बताया गया था कि बीजिंग कैसे अपने पड़ोसियों से हिसाब बराबर कर सकता है और खोए हुए इलाकों पर कब्जा कर सकता है। इसमें कहा गया था कि चीन कम से कम 6 युद्ध लड़ेगा, जिनमें ताइवान युद्ध, दक्षिण चीन सागर पर पूर्ण नियंत्रण के लिए युद्ध, अरूणाचल को लेकर भारत से युद्ध (2035-40), सेनकाकू द्वीप के लिए जापान से युद्ध (2040-2045), बाहरी मंगोलिया के लिए युद्ध (2045-2050) और फिर रूस से युद्ध (2055-2060) करेगा।
भारत से युद्ध को लेकर चीन के बारे में क्या कहा गया है?
चीन की तीसरी लड़ाई में भारत का जिक्र किया गया है। दक्षिणी तिब्बत पर “वापस कब्ज़ा” यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल बीजिंग भारत के अरुणाचल प्रदेश के लिए करता है। चीन की इस स्ट्रैटजी में कहा गया है कि असरदार स्ट्रैटेजी भारत को तोड़ने के लिए उकसाना होगा, क्योंकि भारत अपनी आजादी के बाद से सभी अलगाववादी आंदोलनों से बचा हुआ है। लेकिन अगर यह काम नहीं करता है तो दूसरा सबसे अच्छा ऑप्शन कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान की लड़ाई को भड़काना और भारत का ध्यान भटकाते हुए दक्षिणी तिब्बत पर कब्जा करना है। नवभारत टाइम्स से बात करते हुए भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) ने भी कहा था कि चीन, 2030 के बाद भारत से लड़ने की योजना पर काम कर रहा है और भारत के पास अभी करीब 5 साल तैयारी करने के लिए हैं।













