यूनुस की अंतरिम सरकार की एक्सपर्ट ने पाकिस्तान को बहुत ज्यादा छूट देने के लिए आलोचना की है। यूनुस ने वीजा नियमों में ढील दी और पाकिस्तान को बांग्लादेश के समुद्र तक बिना रोक-टोक के पहुंच दी। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह आतंकवादियों के लिए भारत में एंट्री का संभावित रास्ता हो सकता है।
बीएनपी की पूर्व सरकार में पाकिस्तान से रिश्ते
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की इससे पहले साल 2001 से 2007 तक सरकार थी। उस समय बांग्लादेश के भारत से रिश्ते तनावपूर्ण और पाकिस्तान से उसकी नजदीकी रही थी। उस समय नई दिल्ली ने बांग्लादेश सरकार पर आतंकियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करने देने का आरोप लगाया था।
इस बार चीजें अलग हो सकती हैं क्योंकि जमात-ए-इस्लामी अब बीएनपी की सहयोगी नहीं है। एक्सपर्ट का मानना है कि बीएनपी से अवामी लीग की तरह पाकिस्तान से पूरी तरह दूरी बनाने की उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन तारिक भारत से भी रिश्ते बिगाड़ना नहीं चाहेंगे। वह भारत से अच्छे रिश्ते रखने की अहमियत को समझेंगे।
बांग्लादेश का नहीं होनें देंगे इस्तेमाल
एक अधिकारी के मुताबिक, तारिक के पीएम बनने पर पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते नॉर्मल रहेंगे। हालांकि ऐसा नहीं लगता है कि वह यूनुस सरकार की तरह पाकिस्तानी एजेंसी ISI को अपने देश को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए खेल का मैदान बनाने की इजाजत दे देंगे।
अधिकारी ने आगे कहा कि तारिक रहमान की पहली चुनौती हिंसा से जूझते देश की कानून व्यवस्था में सुधार लाना है। ऐसे में वह पाकिस्तानी आर्मी और खुफिया एजेंसी को अपनी जमीन पर इतनी खुली छूट नहीं देना चाहेंगे, जिससे कोई नई तरह की मुश्किल उनकी सरकार के सामने पैदा हो।
भारत की कब बढ़ेगी चिंता
ढाका और इस्लामाबाद के बीच सामान्य रिश्ते होने से नई दिल्ली को कोई दिक्कत नहीं होगी। भारत की दिक्कत तब शुरू होगी, जब तारिक रहमान यूनुस के नक्शेकदम पर चलने लगेंगे। यूनुस ने पाकिस्तानी आर्मी और ISI के लोगों को ढाका में अपना प्रभाव बढ़ाने की खुली छूट दे रखी थी।
थिंक-टैंक उसानास फाउंडेशन के फाउंडर अभिनव पांड्या का कहना है कि बीएनपी ने अपना इस्लामी रुख नहीं छोड़ा है लेकिन इस बार वह सरकार में प्रैक्टिकल सोच दिखा सकती है। तरिक रहमान ने ने नेशन-फर्स्ट पॉलिसी के बारे में बात की है, जो अच्छा संकेत है।
पांड्या ने आगे कहा, ‘यह साफ है कि तारिक किसी देश को बांग्लादेश के मामलों में दखल नहीं देने देंगे। उन्होंने ना दिल्ली, ना पिंडी का नारा दिया है।यह बदलाव का संकेत है। तारिक रहमान अपनी देश-पहले की पॉलिसी पर चलेंगे। यह उनकी विदेश नीति के रिश्तों के लिए एक बेहतर तरीका है।













