जियो टीवी के मुताबिक, अहसान इकबाल ने अपने पीएम शहबाज शरीफ के प्रतिनिधि के तौर पर तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर उनसे मुलाकात की और चुनाव में जीत की बधाई दी। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान सरकार की ओर से तारिक को इस्लामाबाद आने के लिए दावत दी। पाकिस्तान की तारिक को बुलाकर इस्लामाबाद-ढाका की नजदीकी बढ़ाने की कोशिश है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंध
पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक रूप से अच्छे नहीं रहे हैं। दोनों मुल्कों में कई मुद्दों पर तनाव रहा है। खासतौर से 1971 में पाकिस्तानी आर्मी के बंगालियों पर किए गए अत्याचार को लेकर ढाका में गुस्सा रहा है। यह तब हुआ था, जब पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) के लोगों ने पाकिस्तान से आजादी के लिए आंदोलन चलाया था।
पाकिस्तान ने बांग्लादेश से रिश्ते को सुधारने के लिए हालिया समय में कोशिश की है। खासतौर से अगस्त, 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सत्ता संभालने के बाद इस्लामाबाद ने तेजी से ढाका में अपनी पैठ बढ़ाई है। इस पैठ को पाकिस्तान तारिक रहमान की नई सरकार में भी बनाए रखना चाहता है।
तारिक को लुभाने की कोशिश में पाकिस्तान
बीएनपी का रुख पाकिस्तान के लिए नरम माना जाता है। तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के शासन में पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे थे। पाकिस्तान की कोशिश है कि तारिक सरकार से भी संबंधों को बेहतर रखा जाए। हालांकि तारिक रहमान ने भारत और पाकिस्तान से संबंधों में संतुलन बनाने के संकेत दिए हैं।
बांग्लादेश में करीब दो दशक तक सत्ता से बाहर रही बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी ने इन चुनावों में जबर्दस्त वापसी की है। बीएनपी ने चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। 299 सीटों पर हुए चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को 211 सीटों पर जीत मिली हैं। वहीं मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें हासिल हुई हैं।













