तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी ने देश की 300 संसदीय सीटों में से 292 पर चुनाव लड़ा। बाकी सीटें इसने सहयोगियों के साथ साझा कीं। बीएनपी का सामना देश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 पार्टियों के गठबंधन से था। लेकिन मतदान से करीब डेढ़ महीने पहले देश वापसी करने वाले तारिक रहमान ने पार्टी में जान फूंक दी और इसे प्रचंड बहुमत तक पहुंचा दिया।
बांग्लादेश चुनाव में BNP को कितनी सीट?
बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी मीडिया द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अनऑफिशियल नतीजों में 181 सीटों पर जीत हासिल की है। यह संख्या बहुमत के लिए 151 के आंकड़े से बहुत आगे है। इसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे जमात के नेतृत्व वाला गठबंधन 61 सीटें हासिल कर पाया है। इस्लामी आंदोलन को केवल एक सीट मिली है। वहीं, 6 सीटें अन्य के खाते में गई हैं। ये आंकड़े शुक्रवार सुबह 10 बजे तक के हैं।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जनरल जियाउर रहमान और तीन बार देश प्रधानमंत्री रहीं बेगम खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। वह पिछले 17 साल से निर्वासन में लंदन में रह रहे थे और 25 दिसम्बर 2025 को ढाका लौटे थे। देश लौटने के कुछ समय बाद बीमार चल रही खालिदा जिया का निधन हो गया और रहमान का बीएनपी का प्रमुख चुना गया। इसके पहले वे एक्टिंग चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे।
ढाका का ‘डार्क प्रिंस’
तारिक रहमान को बीएनपी का डार्क प्रिंस कहा जाता है। 2005 में अमेरिकी विदेश विभाग की एक केबल में रहमान को इस नाम से संबोधित किया गया था, जिसे बाद में विकिलीक्स ने रिलीज किया था। केबल में बांग्लादेश के अंदर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हिंसा में तारिक रहमान के शामिल होने का जिक्र किया गया था। साल 2001 से 2006 तक BNP और जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन वाली सरकार के दौरान खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं, लेकिन असली बॉस रहमान को ही माना जाता था।
तारिक रहमान का ‘शैडो PMO’
रहमान उस समय हवा भवन से काम कर रहे थे, जिसे शैडो PMO कहा जाता था। यह एक दो मंजिला इमारत थी, जिसमें एक विंड टनल था। अब रहमान एक बार फिर पूर्ण ताकत के साथ सत्ता में असल बॉस के रूप में लौट रहे हैं तो कई लोगों को उस दौर के लौटने की आशंका सताने लगी है। 2006 से 2008 का दौर हिंसक अशांति से भरा था। इसी दौरान एक केयरटेकर सरकार आई जिसने मई 2007 में रहमान को गिरफ्तार कर लिया।
तारिक रहमान को अलग-अलग आरोपों में 17 महीने तक हिरासत में रखा गया। इस दौरान रहमान को टॉर्चर किए जाने की बात भी सामने आई। हाल ही में एक पूर्व आर्मी चीफ ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल के सामने बयान में इसके बारे में जानकारी दी थी। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई मामलों में दोषी ठहराया गया। हसीना की हत्या की साजिश के मामले में भी दोषी पाया गया। 2024 में छात्र विद्रोह में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद उनके खिलाफ फैसले पलट दिए गए।













