तुर्की ने पाकिस्तान को इशारों में समझाया
फिदान ने कहा, “अपनी सुरक्षा आउटसोर्स न करें।” उन्होंने तर्क दिया कि क्षेत्र में मुख्य समस्या सिर्फ बाहरी हस्तक्षेप नहीं है, बल्कि राष्ट्रों के बीच भरोसे की गहरी कमी है। उनके अनुसार, जब तक क्षेत्रीय देश अपनी समस्याओं की जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक स्थिरता नहीं आ सकेगी। तुर्की के लिए, क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एकजुटता, संस्थागतकरण और आखिरकार ऐसे समझौते और मंच बनाने की जरूरत है जो बाहरी शक्तियों पर निर्भरता के बजाय साझा हितों को दर्शाते हों।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते से तुर्की का किनारा
फिदान ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी कोई भी व्यवस्था समावेशी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “कोई तुर्की प्रभुत्व नहीं, कोई अरब प्रभुत्व नहीं, कोई फारसी प्रभुत्व नहीं, कोई अन्य प्रभुत्व नहीं।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि तुर्की का लक्ष्य जिम्मेदार क्षेत्रीय कार्रवाई है, न कि कोई पदानुक्रम बनाने का है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि एक मंच दो या तीन देशों से शुरू हो सकता है, लेकिन समय के साथ इसे सर्व-समावेशी बनने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने बार-बार नियमों पर आधारित सहयोग और क्षेत्रीय स्वामित्व पर जोर दिया।
मध्य पूर्व में बड़ा खिलाड़ी बना तुर्की
तु्र्की इन दिनों मध्य पूर्व में अपने प्रभाव को बढ़ा रहा है। सऊदी अरब के साथ तुर्की के संबंध मजबूत हुए हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ तुर्की की दूरियां बढ़ी हैं। मध्य पूर्व के सबसे ज्वलंत मुद्दे फिलिस्तीन पर भी तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान एकमत हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य कर लिया है। वहीं, तुर्की-इजरायल संबंधों में गाजा युद्ध को लेकर गंभीर तनाव है।













