• International
  • तुर्की NATO की छतरी के नीचे कभी भी बना सकता है परमाणु बम, भारत को चिंता करनी चाहिए, अमेरिकी एक्सपर्ट की चेतावनी

    अंकारा/वॉशिंगटन: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक बार लिखा था कि “एक हिंदू बम है, एक यहूदी बम है और एक ईसाई बम है। एक इस्लामिक बम जरूर होना चाहिए।” भारत के 1974 के न्यूक्लियर टेस्ट के बाद उन्होंने कहा था कि “हम पत्ते और घास खाएंगे भूखे भी रहेंगे लेकिन हम


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 22, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    अंकारा/वॉशिंगटन: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक बार लिखा था कि “एक हिंदू बम है, एक यहूदी बम है और एक ईसाई बम है। एक इस्लामिक बम जरूर होना चाहिए।” भारत के 1974 के न्यूक्लियर टेस्ट के बाद उन्होंने कहा था कि “हम पत्ते और घास खाएंगे भूखे भी रहेंगे लेकिन हम अपना एक बम जरूर बनाएंगे।” भारत के तो परमाणु हथियार बनाने की वजह चीन था जिसने 1962 में हमला किया था और लद्दाख के 38,000 वर्ग किलोमीटर हिस्से पर कब्जा कर लिया था लेकिन पाकिस्तान की वजह मजहब, इस्लामिक दुनिया का नेता बनने जैसा मकसद था।

    कारगिल युद्ध के समय अमेरिका और चीन में भी डर था कि भारत और पाकिस्तान कहीं न्यूक्लियर जंग में ना फंस जाएं। मिडिल ईस्ट फोरम में पॉलिसी एनालिसिस के डायरेक्टर और वाशिंगटन, DC में अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो माइकल रूबीन ने संडे गार्डियन में एक लेख लिखा है। जिसमें उन्होंने तुर्की को लेकर भारत को चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा है कि “मई 2000 में पेशावर की मेरी पहली यात्रा के दौरान सरकार ने एक बड़े ट्रैफिक सर्कल के अंदर शाहीन-2 मिसाइल का एक मॉक-अप खड़ा किया था जिसके नीचे लिखा था कि “मुझे भारत में आना अच्छा लगेगा।””

    अमेरिकी एक्सपर्ट ने भारत को क्यों सावधान रहने की दी सलाह
    माइकल रूबीन ने लिखा है कि ऑपरेशन सिंदूर वो मोड़ था जहां से भारत ने पाकिस्तानी परमाणु बमों की परवाह करनी बंद कर दी है। लेकिन तुर्की एक चुनौती पेश करेगा। भारत की सीमा से करीब साढ़े 4 हजार किलोमीटर दूर तुर्की भी एक आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश ही है। पाकिस्तान को कम से कम इस बात का डर होगा कि भारत पर गिरने वाले परमाणु बम का उसपर भी असर होगा, लेकिन तुर्की ये सोच सकता है कि वो इस बम के असर से खुद को बचा सकता है। अमेरिका, तुर्की को लेकर वर्षों से या तो सोया हुआ है या भोला बना हुआ है। लेकिन इजरायल उस खतरे को जानता है और वो सावधान है, इसलिए भारत को भी तुर्की के खतरो को समझना चाहिए।

    उन्होंने लिखा है कि राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की इस्लामिस्ट सोच और नाटो की सदस्यता तुर्की के लिए परमाणु बम बनाने का रास्ता खोलती है। पाकिस्तान और ईरान के उलट तुर्की NATO के आर्टिकल V के तहत अपनी न्यूक्लियर क्षमता विकसित कर सकता है जो किसी एक पर हमले को सभी पर हमला मानता है। तुर्की को पता है कि भारत, जो पाकिस्तान के 11 एयरबेस को तबाह कर सकता है या इजरायल, जो ईरान पर हमला कर सकता है, लेकिन एर्दोगन जानते हैं कि नाटो का सदस्य होने की वजह से उसपर हमला नहीं होगा। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर और एंटी-एयरक्राफ्ट ठिकानों को तबाह कर दिया था, लेकिन तुर्की की NATO सदस्यता उसे ऐसे हमलों से बचाती है।

    तुर्की पर क्यों आंख मूंदकर रहते हैं यूरोप-अमेरिका
    माइकल रूबीन ने लिखा है कि अमेरिका वर्षों से तुर्की को लेकर नासमझ बना हुआ है और यूरोप लालची है। इसके अलावा यूरोप डरता है कि तुर्की पर कार्रवाई करने से एर्दोगन माइग्रेंट्स की बाढ़ ला देंगे। तुर्की अपने स्लीपर सेल को एक्टिवेट कर सकता है और एर्दोगन ने राष्ट्रपति ट्रंप के परिवार को भारी भरकम रिश्वत खिलाकर रखा हुआ है। माइकल रूबीन चेतावनी देते हैं कि एर्दोगन सिर्फ यहूदियों को ही नहीं, बल्कि सभी गैर मुस्लिमों को नफरत की नजर से देखते हैं और उनकी नजर में भारत में भी इस्लामिक सरकार होना चाहिए।

    एर्दोगन भी ईरान के सुप्रीम लीडर की तरह बढ़ती उम्र के साथ खतरनाक कट्टर होते जा रहे हैं, इसीलिए वो चैरिटी, मीडिया और दूसरे तरहों से आतंकवाद को समर्थन कर रहा है। एर्दोगन को इस्लामिक खलीफा और ऑटोमन सुल्तान बनने का भ्रम है। इसीलिए भारत को सावधान रहने की जरूरत है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।