अगर सुप्रीम कोर्ट इन टैरिफ को रद्द कर देता है, तो भारत को दुनिया भर में सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है। इससे भारतीय निर्यात पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा एक और बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप ने हाल ही में एक बिल को मंजूरी दी है, जिसके तहत रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 500% का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाता है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक क्षमता के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।
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क्यों है खास?
बाजार के जानकार सिर्फ फैसले का ही इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे फैसले की डिटेल पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट टैरिफ व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर देगा, या फिर यह एक आंशिक फैसला होगा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि कल बाजार में आई भारी गिरावट की वजह यह आशंका थी कि रूस पर लगे प्रतिबंधों वाले कानून के तहत भारत पर करीब 500% का टैरिफ लग सकता है। अब बाजार की नजरें अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।”
उन्होंने कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि फैसला ट्रंप के खिलाफ जाए। लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया इसकी डिटेल पर निर्भर करेगी। यह देखना होगा कि टैरिफ को आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा या उन्हें पूरी तरह से अवैध घोषित किया जाएगा। अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित करता है, तो भारतीय बाजार में तेजी आएगी क्योंकि भारत 50% टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
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टैरिफ पर आरपार
इसके विपरीत, अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को बरकरार रखता है, तो बाजारों में और ज्यादा अस्थिरता और नीतिगत अनिश्चितता बनी रह सकती है। ऊंचे टैरिफ से सप्लाई चेन में लागतें बढ़ी रहेंगी। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है और पूंजीगत व्यय के फैसले टल सकते हैं। ऐसी स्थिति में, विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बाजार एक दायरे में घूमेगा और बड़े पैमाने पर तेजी के बजाय चुनिंदा शेयरों में ही हलचल दिखेगी।












