उस विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी)को हराकर राज्य में 27 साल लंबे कम्युनिस्ट पार्टियों के शासन को खत्म कर दिया था। उस समय गोचर का शनि कन्या राशि में मिथुन से चतुर्थ(सिंहासन)भाव में था और बृहस्पति मिथुन से दशम(राज सत्ता) भाव में मीन राशि में शुक्र, बुध और मंगल के साथ था। राहु तब धनु राशि में था। सभी बड़े ग्रह पश्चिम बंगाल की प्रभाव राशि मिथुन से दशम भाव (सरकार) पर असर डाल रहे थे जो राज्य में बड़े सत्ता परिवर्तन का कारण बना था।
वर्तमान में पश्चिम बंगाल की प्रभाव राशि मिथुन में गुरु गोचर कर रहे हैं और इस राशि से दशम भाव में शनि मीन राशि में चल रहे है। जल्द ही अप्रैल माह में अन्य ग्रह जैसे सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल एक-एक कर मीन राशि से होकर गोचर में गुजरेंगे जो पश्चिम बंगाल के होने वाले विधानसभा चुनावों में इस वर्ष बड़े आश्चर्यजनक नतीजों का ज्योतिषीय संकेत दे रहे हैं।
चंद्र शुक्र की दशा में अच्छा रहेगा बीजेपी का प्रदर्शन
पश्चिम बंगाल राज्य में वर्ष 2021 में कोरोना वायरस महामारी के दौरान हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी 294 सीटों के लिए हुए मुकाबले में 38.15% वोट लेकर 77 सीट जीत पायी थी। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस 48.2% वोटों के साथ 215 सीटों पर बड़ी विजय हासिल कर लगातार तीसरा चुनाव जीतने में सफल हुई थी। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वाम दलों का लगभग सूपड़ा साफ हो गया था। इस बार के चुनावों में गोचर में शनि और गुरु की स्थिति बता रही है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कुछ बड़े नेता भी चुनाव हार सकते हैं।
प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी की मिथुन लग्न की कुंडली से देखें तो चुनाव के समय चन्द्रमा की महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा चल रही होगी। चन्द्रमा बीजेपी की कुंडली में धन स्थान के स्वामी होकर छठे भाव में उत्तम श्रेणी के नीच भंग राजयोग में सम्मिलित हैं। किन्तु अन्तर्दशानाथ शुक्र बारहवें घर में चन्द्रमा और शनि से दृष्ट होकर मिले-जुले फल दे सकते हैं। बीजेपी का प्रदर्शन चुनावों में अच्छा रहेगा किन्तु पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी हाथ से थोड़ी दूर रह सकती है।
गुरु की महादशा में तृणमूल कांग्रेस की हो सकती है वापसी
तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1 जनवरी 1998 को सुबह 11 बजे कोलकाता में हुई थी। तृणमूल कांग्रेस पार्टी की मीन लग्न की मूल कुंडली में लग्न के स्वामी बृहस्पति और लाभ भाव के स्वामी शनि के बीच सुंदर स्थान परिवर्तन योग बन रहा है। वर्ष 2011 में राहु की महादशा में गुरु की अंतरदशा में यह पार्टी ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम मंगल की सत्ता में आयी थी। तृणमूल कांग्रेस पार्टी की कुंडली में लाभ के ग्यारहवें भाव में गुरु, चन्द्रमा, मगल और शुक्र का बड़ा धन योग बन रहा है। इस योग के प्रभाव से इस पार्टी ने प्रदेश में अन्य दलों के नेताओं को अपनी तरफ खींच कर अपना तेजी से विस्तार किया।
अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा चुनाव के समय बृहस्पति की दशा, बृहस्पति की अंतर्दशा और शनि की प्रत्यंतर दशा 30 मार्च 2026 से 1 अगस्त 2026 तक चलेगी। गुरु और शनि तृणमूल कांग्रेस की जन्म कुंडली और नवमांश कुंडली दोनों में मजबूत स्थिति में हैं। किन्तु तृणमूल कांग्रेस की मीन लग्न की स्थापना कुंडली में गुरु मकर राशि में नीच के हैं और गुलिक से युति कर रहे हैं। गुलिक के दशानाथ गुरु पर प्रभाव के चलते इस पार्टी के नेता विवाद में आ सकते हैं। गुरु के नीच-भंग होने के चलते तृणमूल कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी कर सकती है किंतु बेहद कठिनाई के साथ।













