अभी कच्चे तेल की कीमत करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। जेएम फाइनेंशियल निवेशकों को तेल और गैस कंपनियों में सोच-समझकर पैसा लगाने की सलाह दे रही है। इस फर्म ने ऑयल इंडिया (Oil India) और ओएनजीसी (ONGC) जैसी सरकारी कंपनियों पर ‘बाय’ (खरीदें) की रेटिंग बरकरार रखी है। वहीं, दूसरी ओर सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए कुछ वित्तीय जोखिमों की चेतावनी दी है।
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क्या है फर्म की चेतावनी
जेएम फाइनेंशियल का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें कम रहने से तेल मार्केटिंग कंपनियों को फिलहाल मार्केटिंग मार्जिन (मुनाफे का अंतर) अच्छा मिल सकता है। फर्म का कहना है कि सरकार आने वाले बजट में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा सकती है, जिससे तेल कंपनियों को कम कच्चे तेल की कीमतों से होने वाला फायदा कम हो सकता है।
सरकार को मिलेंगे अरबों रुपये
ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि ओएमसी (OMCs) का ऑटो-फ्यूल पर मिला-जुला ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) लगभग 8.2 रुपये प्रति लीटर है, जबकि ऐतिहासिक रूप से यह 3.5 रुपये प्रति लीटर रहा है। इसका मतलब है कि एक्साइज ड्यूटी में 3 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गुंजाइश है। फर्म ने यह भी बताया है कि एक्साइज ड्यूटी में हर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से केंद्र सरकार को सालाना 165 अरब रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
आम आदमी पर क्या असर?
अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाती है तो तेल कंपनियां इसका भार आम जनता पर डाल सकती हैं। यानी पेट्रोल और डीजल की कीमत में तेजी आ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो देश में महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि सरकार तेल कंपनियों से कीमत ना बढ़ाने के लिए भी कह सकती है। पिछले साल सरकार ने ऐसा ही किया था। इससे तेल कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है।
कच्चा तेल क्यों हो सकता है सस्ता?
जेएम फाइनेंशियल ने वैश्विक तेल बाजारों में लगातार बनी हुई अधिक आपूर्ति को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी का मुख्य कारण बताया है। फर्म ने कहा है कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि साल 2025 में वैश्विक तेल अधिशेष (surplus) लगभग 2.3 मिलियन बैरल प्रति दिन रहेगा, जो 2026 में बढ़कर लगभग 3.8 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगा। यह वृद्धि ओपेक+ देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने और गैर-ओपेक देशों से आपूर्ति बढ़ने के कारण होगी। अगर यूक्रेन के साथ शांति समझौते के तहत रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो इससे आपूर्ति का दबाव और बढ़ सकता है।












