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  • थाईलैंड ने जिस जगह भगवान विष्णु की प्रतिमा तोड़ी थी, वहीं लगाई बुद्ध की मूर्ति, कंबोडिया आग बबूला

    बैंकॉक: थाईलैंड की सेना ने करीब एक महीने पहले कंबोडिया से लगती सीमा पर स्थापित भगवान बुद्ध की प्रतिमा तोड़ डाली थी। अब उस जगह पर भगवान बुद्ध की मूर्ति लगाई गई है। थाईलैंड ने इसे मनोबल बढ़ाने वाला धार्मिक कदम बताया है। वहीं, थाईलैंड के इस कदम का कंबोडिया ने कड़ा विरोध किया है


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    By Azad Hind Desk जनवरी 26, 2026
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    बैंकॉक: थाईलैंड की सेना ने करीब एक महीने पहले कंबोडिया से लगती सीमा पर स्थापित भगवान बुद्ध की प्रतिमा तोड़ डाली थी। अब उस जगह पर भगवान बुद्ध की मूर्ति लगाई गई है। थाईलैंड ने इसे मनोबल बढ़ाने वाला धार्मिक कदम बताया है। वहीं, थाईलैंड के इस कदम का कंबोडिया ने कड़ा विरोध किया है और इसे उकसाने वाली कार्रवाई करार दिया है। भारत ने भगवान विष्णु की प्रतिमा तोड़े जाने पर कहा था कि “मूर्ति तोड़ने से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है, ऐसे समय में जब सीमा पर शांति नाजुक बनी हुई है।” रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड की सेना ने कहा है कि उसने स्थानीय निवासियों और सैनिकों का समर्थन करने के लिए थाईलैंड में आन मा और कंबोडिया में आन सेस के नाम से जाने जाने वाले विवादित सीमा क्षेत्र में, बुद्ध की मूर्ति स्थापित की है। सेना ने इस कदम को सीमा पर जारी तनाव के बीच एक धार्मिक कदम बताया है, न कि राजनीतिक।

    आपको बता दें कि ये विवाद दिसंबर 2025 में थाईलैंड और कंबोडिया के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद शुरू हुआ था। इस दौरान थाईलैंड की सेना ने सीमा पर स्थापित भगवान विष्णु की एक मूर्ति तोड़ डाली थी। यह मूर्ति 2013 में कंबोडियाई सेना ने उस जमीन पर लगाई थी, जिसे थाईलैंड अपनी मानता है। थाईलैंड के अधिकारियों ने कहा है कि मूर्ति हटाने का मकसद थाई सैनिकों द्वारा इलाके पर दोबारा कंट्रोल हासिल करने के बाद संप्रभुता जताना था, न कि किसी धर्म को निशाना बनाना था।

    थाईलैंड ने विष्णु की प्रतिमा तोड़कर बुद्ध की मूर्ति लगाई
    थाईलैंड ने कहा है कि कंबोडिया इस मामले में ‘गलत बातें’ फैला रहा है। उसने जोर देकर कहा है कि “मूर्ति तोड़ने या नई मूर्ति लगाने के पीछे धर्म मकसद नहीं था। उसने कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और विश्वास के दायरे में किया गया था, साथ ही इलाके में थाई नागरिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए भी।” जबकि कंबोडिया ने इस कदम को संघर्ष विराम की भावना के खिलाफ बताया है। फनोम पेन्ह ने बुद्ध की मूर्ति लगाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह तनाव कम करने की कोशिशों के खिलाफ है। कंबोडियाई अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई संघर्ष विराम के तहत सहमत “तनाव कम करने के उपायों के साथ असंगत” थी। कंबोडिया ने उस जमीन पर अपने दावे को दोहराया है। उसने तर्क दिया है कि पहले वाली विष्णु की मूर्ति उसके इलाके में थी।

    प्रीह विहार के सीमावर्ती प्रांत में कंबोडियाई सरकार के प्रवक्ता किम चानपान्हा ने कहा कि तोड़ी गई मूर्ति कंबोडिया के कंट्रोल वाली ज़मीन पर थी। उन्होंने कहा कि 2014 में बनी यह मूर्ति “एन सेस इलाके में हमारे इलाके के अंदर थी”। चानपान्हा ने आगे कहा कि “हम प्राचीन मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ने की निंदा करते हैं जिनकी पूजा बौद्ध और हिंदू अनुयायी करते हैं।”

    भारत ने धार्मिक भावनाओं पर चिंता जताई
    भगवान विष्णु की मूर्ति तोड़े जाने के बाद भारत ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। नई दिल्ली की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि “ऐसे अपमानजनक काम दुनिया भर के मानने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए।” बयान में यह भी कहा गया कि “हिंदू और बौद्ध देवी-देवताओं को पूरे इलाके के लोग हमारी साझा सभ्यता की विरासत के हिस्से के तौर पर बहुत सम्मान देते हैं और उनकी पूजा करते हैं।”

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