रूबल को 25 सितंबर 2025 की देर रात अमृतसर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैंकॉक जाने से पहले लुक आउट सर्कुलर (LoC) के आधार पर हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना था कि अरोपी को 22 सितंबर को नोटिस देकर बुलाय गया था, नहीं आया तो 24 सितंबर को LoC जारी कराया गया। 26 सितंबर को अमृतसर एयरपोर्ट से कस्टडी में लिया और पूछताछ के बाद छोड़ दिया। नोटिस देकर 27 सितंबर को बुलावा तो सबूत मिलने पर सुबह 11 बजे गिरफ्तार किया गया।
एयरपोर्ट पर रोके जाने के बाद था कस्टडी में
वकील ने दलील दी कि आरोपी ने दिल्ली के बजाय अमृतसर से बैंकॉक जाने की कोशिश की, जो फरार होने का इरादा बनता है। आरोपी के वकीलों ने कोर्ट में दलील रखी कि एयरपोर्ट पर रोके जाने के बाद से ही आरोपी ‘कस्टडी’ में था, जिसे 24 घंटे मैं मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस 26 सितंबर दोपहर 2 बजे एयरपोर्ट से लाई, जिसे 27 सितंबर शम 4:00 बजे कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने बताया, कब से मानी जाएगी गिरफ्तारी
कोर्ट ने पुलिस पर सवाल उठाया कि जनरल डायरी (GD) एंट्री में 26 सितंबर को रिहा करना दर्ज नहीं है। पुलिस ने पूछताछ की जगह और रिहाई का तरीका नहीं बताया है। मानना कठिन है कि 26 सितंबर को छोड़ा गया था। गिरफ्तारी तभी से मानी जाएगी, जब से स्वतंत्रता पर रोक लग गई। चौबीस घंटे के भीतर मैजिस्ट्रेट के सामने पेश करना संवैधानिक अनिवार्यता है। वे दिल्ली पुलिस के स्टैडिंग ऑर्डर नंबर 109/2020 में दिए नोटिस देने की प्रक्रिया का भी उल्लंघन है।
ये तो घोर लापरवाही है जनाब!
रूबल के पकड़े जाने के बाद पत्नी और चार बेटियां एक गाड़ी में सवार होकर 26 सितंबर 2025 को यूपी से दिल्ली की तरफ आ रही थी। इसी दौरान उनका एक्सिडेंट हो गया, जो बाल-बाल बचे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल सेल ने इसी वजह से रूबल को उस दिन छोड़ने की ‘भूल’ की थी, जिस ‘गलती’ को वकीलों ने हाई कोर्ट में रखा तो बेल मिल गई। इसी हादसे की वजह से आरोपी को 21 दिन की परोल भी मिली थी। बहरहाल, कोर्ट ने यह माना कि आरोप गंभीर है, लेकिन संवैधानिक उल्लंघन के मद्देनजर बेल दी जा रही है।
इस फैसले की अहमियत
हाई कोर्ट के इस ऑर्डर से एक बार फिर साफ हो गया है। कि औपचारिक गिरफ्तारी के समय के बजाय कस्टडी की शुरुआत तब से मानी जाएगी, जब से व्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहला प्रतिबंध लगता है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी 24 घंटे से ज्यादा पुलिस हिरासत रखना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187 (1) और संविधान के अनुच्छेद 22 (2) का उल्लंघन है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला भविष्य में एयरपोर्ट पर LOC के आधार पर की जाने वाली हिरासत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर एक नजीर साबित होगा।














