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  • दिल्ली में प्रॉपर्टी हड़पने का फिल्मी खेल, अखबार में छपे एक नोटिस से शातिर गैंग का भंडाफोड़

    नई दिल्ली: फिल्म खोंसला का घोंसला तो याद ही होगी आपको। जहां एक प्रॉपर्टी डीलर बोमन ईरानी फर्जी तरह से अनुपम खेर की मेहनत की कमाई से खरीदी जमीन हो हड़प लेता है। ऐसा ही कुछ खेल दिल्ली में भी चल रहा था। लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस संगठित गैंग का भंडाफोड़


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    By Azad Hind Desk फरवरी 2, 2026
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    नई दिल्ली: फिल्म खोंसला का घोंसला तो याद ही होगी आपको। जहां एक प्रॉपर्टी डीलर बोमन ईरानी फर्जी तरह से अनुपम खेर की मेहनत की कमाई से खरीदी जमीन हो हड़प लेता है। ऐसा ही कुछ खेल दिल्ली में भी चल रहा था। लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस संगठित गैंग का भंडाफोड़ कर दिया है। ये गैंग फर्जी दस्तावेज बनाता और कानूनी प्रक्रिया में उलझाकर करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़प लेता। इस धंधे में एडवोकेट से लेकर NRI तक शामिल थे।

    दरअसल एक बुजुर्ग की शिकायत ग्रेटर कैलाश थाने में पिछले साल केस दर्ज हुआ था। इसे क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया। जांच के बाद अब एडवोकेट समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान एडवोकेट आशीष चौधरी, उसके दोस्त दिलीप कुमार पांडेय और अमेरिकी नागरिक विनीत कुमार सहगल के तौर पर हुई है। पुलिस पता लगा रही है कि इस गैंग ने अब तक ऐसी कितनी वारदात को अंजाम दिया है।

    पब्लिक नोटिस से खुली पोल

    दरअसल बुजुर्ग को रिश्तेदार से जानकारी मिली कि उनकी 525 गज की प्रॉपर्टी को लेकर एक अखबार में पब्लिक नोटिस निकाला गया है। अनजान शख्स ने मालिक होने का दावा किया है। बुजुर्ग ने नोटिस निकालने वाले विनीत सहगल से संपर्क किया और दस्तावेज मांगे। सहगल ने अपने पिताजी के नाम की एक ‘फर्जी’ वसीयत दिखाई, लेकिन प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट्स यूएस के मिशिगन स्थित घर पर होने का दावा किया हैं। यह यूएस नागरिक पांच महीने तक दस्तावेज पेश नहीं कर पाया।

    वकील ने किया गजब खेल

    पुलिस का दावा है कि विनीत ने एडवोकेट आशीष चौधरी से मोटी फीस का लालच देकर प्रॉपर्टी दस्तावेज बनवाने में मदद मांगी। आशीष ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट से दस्तावेजों की फोटो कॉपी निकलवा कर चेन तैयार कर ली। वकील के मन में भी खोट आ गया, जिसने दोस्त दिलीप पांडेय के मृतक पिता अंबिका पांडेय के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार की। इसके बाद आशीष ने भी फर्जी दस्तावेज बनवा कर दिलीप से प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली। तीनों क्लेम करने लगे, ताकि प्रॉपर्टी विवादित हो जाए।

    बुजुर्ग ने प्रॉपर्टी 1964 में खरीदी थी। 2009 के बाद से खाली पड़ी थी। गैंग ने साजिश रची और दावा किया कि 3 लाख में खरीदी है। साजिश ये थी कि अगर बेच पाए तो ठीक वरना बुजुर्ग से मोटी रकम वसूल लेंगे। ऐसा नहीं हुआ तो प्रॉपर्टी डिस्प्यूड पैदा कर कोर्ट केस डाल देंगे। लंबी कानूनी प्रक्रिया में फांस कर रकम वसूलते या अगर उनकी मौत हो जाती तो कब्जा लेते।
    आदित्य गौतम, DCP दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच

    प्रॉपर्टी की पहचान करते और फिर शुरू होता खेल

    डीसीपी (क्राइम) आदित्य गौतम के मुताबिक, पिछले साल ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 निवासी बुजुर्ग ने 1964 में खरीदी गई करोड़ों की प्रॉपर्टी को फर्जी दस्तावेज के जरिए हड़पने की शिकायत दी थी। स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई। इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया ने तफ्तीश में पाया कि प्रॉपर्टी के असली दस्तावेज बुजुर्ग के पास थे। एक गिरोह का पता चला, जो लंबे वक्त से खाली पड़ी प्रॉपर्टी की पहचान करता है।

    नकली दस्तावेज ऐसे कि असली भी हो जाएं फेल

    प्रॉपर्टी की पहचान करते के बाद जाली वसीयत, Release Deed और Sale Deeds समेत झूठी मालिकाना चेन तैयार की जाती। इसके दम पर प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया जाता। अगर मामला दर्ज होता तो खुद ही कोर्ट में सिविल केस दायर कर नकली दस्तावेजों को असली साबित करने के लिए पीड़ित को लंबे वक्त तक कानूनी प्रक्रिया में उलझा दिया जाता। इस दौरान ऐसे फर्जी गवाह पेश किए जाते, जो मर चुके हैं या फिर वो बताए गए एड्रेस पर रहते ही नहीं हैं।

    फर्जी कागजों के 2 सेट तैयार किए जाते

    ग्रेटर कैलाश की प्रॉपर्टी हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेजों को दो सेट तैयार किए गए थे। ऐसा इसलिए किया जा जाता था ताकि अगर एक साजिश विफल हुई तो दूसरे तरीके से प्रॉपर्टी बेच कर मोटा मुनाफा कमा सके। एसीपी वीकेपीएस यादव की देखरेख में बनी इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया, एसआई अनुरोग, राजेश कुमार और हेड कॉन्स्टेबल विपिन की टीम ने 22 जनवरी को आरोपी विनीत सहगल, दिलीप कुमार पांडेय और आशीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी आशीष पेशे से वकील है, जबकि दिलीप पर पहले से एक मुकदमा दर्ज है।

    जमीन पर अवैध कब्जा होने पर क्या करें

    अगर इस तरह की कोई घटना आपके साथ होती है तो घबराएं नहीं। सबसे पहले नजदीक के पुलिस स्टेशन में तुरंत FIR दर्ज कराएं। साथ ही वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भी भिजवाएं। आप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 340 (2) के तहत कोर्ट में केस दर्ज करा सकते हैं।

    प्रॉपर्टी पर कब्जे में अहम कानूनी धाराएं कौन सी हैं

    • धारा 329 (Criminal Tresspassing): अवैध रूप से प्रॉपर्टी में घुसने की कोशिश
    • धारा 331 : अवैध तरीके से संपत्ति में घुसने पर सजा का प्रावधान
    • धारा 340 (2): जाली दस्तावेज बनवाकर फर्जीवाड़ा करने की कोशिश
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