वाहनों से उत्सर्जन और धूल मुख्य कारण
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर तरह-तरह की बातें होती रही हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी तरह के कुछ लोग इसके लिए सारा दोष दीपावली पर पटाखे जलाने को देते हैं। लेकिन, Azad Hind की एक रिपोर्ट के अनुसार कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने देश की सर्वोच्च अदालत में साफ किया है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण और वातावरण में मौजूद धूल इसके सबसे बड़े कसूरवार हैं। हाल ही में मेनका गांधी ने इस मामले में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को इस समस्या से पूरी तरह से क्लीनचिट दे दी थी।
जाम वाले एमसीडी टोल प्लाजा शिफ्ट होंगे
इसके साथ ही सीएक्यूएम ने वायु की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए कुछ शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग टर्म में उठाए जा सकने वाले उपायों वाली सिफारिशों की लिस्ट भी दी है। इन प्रस्तावित उपायों में दिल्ली नगर निगम (MCD) के टोल प्लाजा को ट्रैफिक जाम से छुटकारा दिलाने का प्रस्ताव भी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्तों में मांगा एक्शन प्लान
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली जस्टिस जॉयमाल्या बागजी और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सभी स्टेहोल्डरों से कहा है कि सीएक्यूएम ने जो भी सिफारिशें की हैं, उसपर आपत्ति न करें। इसने केंद्र सरकार, दिल्ली, राजस्थान, यूपी और हरियाणा सरकारों के साथ-साथ विभिन्न नगर निकायों और एमसीडी को 4 हफ्ते के अंदर एक्शन प्लान भी जमा करने को कहा है।
बड़े विशेषज्ञों ने दिए समाधान के सुझाव
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि जो भी सिफारिशें की गई हैं, उसमें शीर्ष विशेषज्ञों की सेवाएं ली गई हैं, जिनमें आईआईटी, बड़े शैक्षणिक संस्थान, रिसर्च संस्था और एनजीओ से जुड़े लोग शामिल हैं। सीएक्यूएम ने कहा कि इस समस्या से छुटकारे के लिए सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों, वैधानिक अथॉरिटी और दूसरी एजेंसियों का पूरा समर्थन चाहिए, क्योंकि यह पूर्ण तालमेल से ही मुमकिन है।














