इस बहस में Eternal (Zomato) के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने कहा कि कैपिटलिज्म में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन यह वैल्यू (धन या संपत्ति) बनाने का सबसे अच्छा तरीका है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘कैपिटलिज्म परफेक्ट नहीं है, लेकिन यह इकलौता ऐसा इंजन है जिसे हमने वैल्यू बनाते हुए देखा है। पहले बनाएं, फिर बांटें। अगर उल्टा किया, तो हम कमी बांटेंगे। इससे किसी का भला नहीं होगा।’ उनकी यह बात उन लोगों की पुरानी सोच को दिखाती है जो मानते हैं कि पैसा कमाने के बाद ही उसे बांटा जा सकता है।
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कुणाल शाह ने की अपील
दीपिंदर गोयल ने फिनटेक कंपनी CRED के फाउंडर कुणाल शाह की एक पोस्ट को शेयर किया था। कुणाल शाह ने लोगों से आर्थिक विचारधाराओं के बारे में ज्यादा जानने की अपील की थी। उन्होंने भारत के पॉपुलर पॉडकास्टर्स से कहा कि वे कैपिटलिज्म और सोशलिज्म, दोनों के फायदे और नुकसान को समझाएं। कुणाल शाह ने कैपिटलिज्म की कमियों को मानते हुए भी कहा कि यह ‘इकलौता ऐसा सिस्टम है जो हमें गरीबी से बाहर निकाल सकता है और देश को मजबूत बना सकता है।’ यह सोच भारत के स्टार्टअप जगत में काफी आम है।
कैपिटलिज्म को बताया समृद्धि का कारण
इस बात का समर्थन करते हुए Seers Fund Management Pvt Ltd के को-फाउंडर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर चंदर भाटिया ने कहा कि कैपिटलिज्म और सामाजिक कल्याण एक दूसरे पर निर्भर करते हैं। भाटिया का मानना था कि कैपिटलिज्म से ही एक ऐसी समृद्धि आती है, जिसके बाद सोशलिस्ट नीतियां ठीक से काम कर पाती हैं। उन्होंने लिखा, ‘अगर सरकार को पर्याप्त टैक्स नहीं मिलेगा, तो वह समाज कल्याण के मोर्चे पर ज्यादा कुछ नहीं कर पाएगी।’ उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्राइवेट बिजनेसमैन नौकरी और मुनाफा कमाने में अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे टैक्स के जरिए पब्लिक वेलफेयर के लिए पैसा आता है।
ध्रुव राठी ने दी चेतावनी
ज्यादातर लोगों के कैपिटलिज्म के पक्ष में बोलने के बीच, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एजुकेटर ध्रुव राठी ने इस मुद्दे को सिर्फ दो हिस्सों में बांटने के खिलाफ चेतावनी दी। राठी का तर्क था कि सिर्फ कैपिटलिज्म या सोशलिज्म जैसे नामों पर बहस करना बेकार है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी देश पूरी तरह से कैपिटलिस्ट या पूरी तरह से सोशलिस्ट नहीं है। उन्होंने लिखा, ‘आज दुनिया का सबसे कैपिटलिस्ट देश भी सोशलिज्म के कुछ तत्व रखता है और सबसे सोशलिस्ट देश भी कैपिटलिज्म के कुछ तत्व रखता है।’
राठी ने नीतियों को बनाने के लिए एक ज्यादा प्रैक्टिकल और सबूतों पर आधारित तरीका अपनाने की बात कही। उन्होंने पॉलिसी बनाने वालों और आम लोगों से कहा कि वे किसी विचारधारा पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय, अलग-अलग नीतियों को उनके अपने गुणों के आधार पर परखें। उनके अनुसार, राष्ट्रीय प्रगति के लिए डेटा, नतीजों और पिछले रिकॉर्ड को हर मामले में अलग-अलग देखना, ‘सैद्धांतिक बातों पर आंख बंद करके भरोसा करने’ से ज्यादा असरदार तरीका है।












