• National
  • देश की अर्थव्यवस्था, कृषि के साथ ही संप्रभुता के लिए खतरा है US से ट्रेड डील, सीपीएम ने क्यों कही ये बात

    नई दिल्ली : कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने रविवार को दावा किया कि भारत ने दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते में अमेरिका को ‘बड़े पैमाने पर रियायतें’ दी हैं। इससे हमारी अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। एक बयान में, लेफ्ट पार्टी ने कहा कि


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 8, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली : कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने रविवार को दावा किया कि भारत ने दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते में अमेरिका को ‘बड़े पैमाने पर रियायतें’ दी हैं। इससे हमारी अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। एक बयान में, लेफ्ट पार्टी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को इस डील को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, और इसे संसद के सामने पेश किया जाना चाहिए।

    भारत और अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की कि वे एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पर पहुंच गए हैं। इसके तहत दोनों पक्ष दो-तरफा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करेंगे।

    अर्थव्यवस्था, कृषि के लिए गंभीर खतरा

    CPI(M) ने अपने पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान में कहा कि जैसे-जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की डिटेल्स सामने आ रही हैं, यह साफ हो रहा है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने तथाकथित ‘अंतरिम समझौते’ में अमेरिका को बड़े पैमाने पर रियायतें दी हैं। ये रियायतें भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

    बयान में कहा गया है कि पब्लिक डोमेन में मौजूद अधूरी जानकारी के अनुसार भी, भारत सरकार फलों, कपास, ट्री नट्स, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य खाद्य और कृषि उत्पादों के अमेरिकी एक्सपोर्ट पर कोई टैरिफ (जीरो टैरिफ) नहीं लगाने पर सहमत हो गई है। पार्टी ने कहा कि इस फैसले से देश भर में लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोयाबीन किसानों की आजीविका को बहुत नुकसान होगा।

    सेब किसान पहले ही परेशान

    CPI(M) ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और दूसरे राज्यों के सेब किसान पहले से ही न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ पहले हुए ट्रेड एग्रीमेंट की वजह से परेशान हैं। अब, अमेरिका के साथ यह मौजूदा डील उनकी रोजी-रोटी को और बर्बाद कर देगी। उसने कहा कि कपास किसान, जो पहले से ही बढ़ती लागत और खेती की बढ़ती मुश्किलों से परेशान हैं, उन्हें भी इसी तरह की बर्बादी का सामना करना पड़ेगा।

    CPI(M) ने यह भी कहा कि रिपोर्ट्स से यह भी पता चलता है कि भारत सरकार ने खाने-पीने और खेती के प्रोडक्ट्स पर नॉन-टैरिफ रुकावटों को हटाने पर सहमति दे दी है। इसमें कहा गया है कि इसका सीधा मतलब होगा भारतीय किसानों के लिए सपोर्ट और सब्सिडी को खत्म करना। इससे वे भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबले के लिए मजबूर हो जाएंगे और भारतीय खेती धीरे-धीरे नुकसानदायक होती जाएगी।

    देश की संप्रभुता को खतरा

    लेफ्ट पार्टी ने कहा कि यह ट्रेड डील हमारी संप्रभुता पर एक झटका है, क्योंकि अमेरिका हमारी नीतियों को तय कर रहा है। इसमें रूस से तेल खरीदने के फैसले भी शामिल हैं। लेफ्ट पार्टी ने कहा कि यह बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार का एक शर्मनाक आत्मसमर्पण है। यह बहुत दुख की बात है कि सरकार ने अमेरिकी रक्षा सप्लाई पर अपनी निर्भरता बढ़ाने का वादा किया है, जो भारत के रणनीतिक हितों के लिए नुकसानदायक होगा।

    CPI(M) ने अपनी मांग दोहराई कि डील की पूरी जानकारी तुरंत संसद के सामने रखी जाए और सार्वजनिक की जाए। पार्टी ने आगे कहा, “सरकार को ऐसे किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से रोकना चाहिए जो भारतीय मजदूरों, किसानों और आम लोगों के हितों के लिए हानिकारक हो।”

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।