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  • ‘देश रूल ऑफ लॉ से चले, जनता के शासन से नहीं’: संवैधानिक नैतिकता पर क्या बोले जस्टिस उज्जवल भुइयां

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जवल भुइयां ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि देश में निश्चित तौर पर कानून का शासन चलना चाहिए, न कि जनता के द्वारा शासन। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि संवैधानिक नैतिकता को हर हाल में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जस्टिस भुइयां ने हैदराबाद में


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    By Azad Hind Desk फरवरी 23, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जवल भुइयां ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि देश में निश्चित तौर पर कानून का शासन चलना चाहिए, न कि जनता के द्वारा शासन। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि संवैधानिक नैतिकता को हर हाल में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। जस्टिस भुइयां ने हैदराबाद में संवैधानिक नैतिकता और जिला न्यायपालिका की भूमिका पर आयोजित एक सेमीनार में यह बात कही है।

    ‘देश कानून के शासन से चलता है’

    बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस उज्जवल भुइयां ने तेलंगाना जजेज एसोसिएशन और तेलंगाना स्टेट जुडिशल एकैडमी की ओर से आयोजित सेमीनार में कहा, ‘संवैधानिक नैतिकता का मतलब है कि देश कानून के शासन से चलता है, न कि जनता के शासन द्वारा।’

    संवैधानिक नैतिकता की अहमियत जरूरी

    जस्टिस भुइयां ने नाज फाउंडेशन बनाम भारत सरकार मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले और नवतेज सिंह जोहर केस में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ से इसके समर्थन का हवाला देते हुए कहा,’हमारी योजना में संवैधानिक नैतिकता को सार्वजनिक नैतिकता के मुकाबले अहमियत मिलेगी, चाहे बहुमत का नजरिया उसी के पक्ष में हो।’

    ‘संवैधानिकता का मुद्दा ही प्रासंगिक’

    जस्टिस भुइयां बोले, ‘एक संवैधानिक अदालत के लिए, उसके सामने मौजूद संवैधानिकता का मुद्दा प्रासंगिक है,प्रभावशाली या लोकप्रिय नजरिया नहीं।’ उन्होंने इस दृष्टिकोण को और साफ करते हुए कहा, ‘संवैधानिक नैतिकता वह बेंचमार्क है, जिसका पालन संविधान हम सबसे चाहता है…असल में यह साथी इंसानों के प्रति सम्मान और आदर का बर्ताव है।’

    न्यायिक स्वतंत्रता पर क्या बोले जस्टिस

    वहीं न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर उन्होंने कहा, ‘न्यायिक स्वतंत्रता, जो कि बिना अनुचित प्रभाव से प्रभावित हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र तरीके से फैसला लेने की जज की क्षमता है, एक संस्थागत आवश्यकता है…इस संवैधानिक आदेश का मतलब जज अपनी समझ और कारण के आधार फैसला देने में सक्षम है, न कि सुविधा या पक्षपात के हिसाब से।’

    कौन हैं जस्टिस उज्जवल भुइयां

    2 अगस्त, 1964 को गुवाहाटी में जन्मे जस्टिस उज्जवल भुइयां 14 जुलाई, 2023 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस भुइयां 17 अक्टूबर, 2011 को गुवाहाटी हाई कोर्ट में एडिश्नल जज बने और 20 मार्च, 2013 को उन्हें कंफर्म किया गया। 3 अक्टूबर, 2019 को उनका तबादला बॉम्बे हाई कोर्ट में किया गया और 22 अक्टूबर, 2021 को वे तेलंगाना हाई कोर्ट में जज बने। तेलंगाना हाई कोर्ट में ही 28 जून, 2022 को उन्होंने चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यभार संभाला।

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