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  • ‘दोषसिद्धि से पहले जमानत मिलनी ही चाहिए’, उमर खालिद के मामले में पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान

    नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत सुप्रीम कोर्ट से नामंजूर किए जाने के बाद अब इस पर पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व सीजेआई ने उमर खालिद जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना मुकदमे के लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय को कमजोर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 19, 2026
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    नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत सुप्रीम कोर्ट से नामंजूर किए जाने के बाद अब इस पर पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का बड़ा बयान सामने आया है। पूर्व सीजेआई ने उमर खालिद जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बिना मुकदमे के लंबी जेल की सजा संवैधानिक न्याय को कमजोर करती है और जमानत की मांग करती है।

    रविवार को जयपुर में एक कार्यक्रम में पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि दोष सिद्धि से पहले जमानत प्राप्त करना एक नागरिक का अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हों, उनमें इस प्रकार की राहत देने से पूर्व मामले की गहराई पड़ताल की जानी चाहिए।

    जमानत अपवाद नहीं बल्कि नियम होना चाहिए: CJI

    उमर खालिद के मामले में डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘वे पांच साल से जेल में हैं। मैं अपने न्यायालय की आलोचना नहीं कर रहा हूं, जमानत की शर्तों का दुरुपयोग रोकने के लिए आप शर्तें लगा सकते हैं, लेकिन आपको यह अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि उन्हें शीघ्र सुनवाई का अधिकार है। यदि वर्तमान परिस्थितियों में शीघ्र सुनवाई संभव नहीं है, तो जमानत अपवाद नहीं बल्कि नियम होना चाहिए।’

    उन्होंने कहा, कि मैंने अपने 24 महीनों के कार्यकाल में, हमने 21,000 जमानत याचिकाओं का निपटारा किया है। ऐसे कई मामले होते हैं जिनके बारे में लोग सुप्रीम कोर्ट की किसी विशेष मामले में जमानत न देने के लिए आलोचना करते समय नहीं सोचते।

    सीजेआई ने बताया किन मामलों में जमानत से किया जा सकता है इंकार

    पूर्व न्यायमूर्ति ने विभिन्न मामलों का उदाहरण देते हुए कहा, अगर आरोपी के समाज में लौट कर फिर से अपराध को अंजाम देने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या जमानत का फायदा कानून के शिकंजे से भाग निकलने के लिए किए जाने की आशंका है तो आरोपी को जमानत देने से इंकार किया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि यदि ये तीनों आधार नहीं हैं, तो जमानत देनी ही होगी। सीजेआई ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘मुझे लगता है कि जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, वहां अदालत का कर्तव्य है कि वह मामले की गहराई से पड़ताल करे। अन्यथा लोग वर्षों तक जेल में बंद रहते हैं।’

    मामलों के निपटारे में देरी पर जताई चिंता

    भारतीय आपराधिक न्याय प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में देरी पर चिंता जाहिर करने के साथ ही उन्होंने कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च कानून है और मामले में कोई ठोस अपवाद नहीं है तथा त्वरित सुनवाई में देरी है, तो आरोपी जमानत का अधिकारी है।

    सत्र और जिला अदालतों द्वारा जमानत नहीं दिए जाने को पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने चिंता का विषय बताया और कहा कि प्राधिकार के प्रति अविश्वास बढ़ा है और न्यायाधीशों को यह डर सताता है कि कहीं उनकी निष्ठा पर सवाल तो नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि जमानतों के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं।

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