विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के कारण एक बार के स्थगन के बाद बैठक दोपहर 12 बजे शुरू हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कराए। उन्होंने आसन के समीप प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के सांसदों को बैनर नहीं दिखाने को कहा। शोर-शराबे के बीच ही स्पीकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 28 जनवरी को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में दिए गए अभिभाषण पर निचले सदन में लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन के समक्ष रखा।
ध्वनिमत से पारित हुआ प्रस्ताव
हंगामे के बीच ही सभा ने ध्वनिमत से प्रस्ताव को पारित कर दिया। धन्यवाद प्रस्ताव के बाद दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर सदन की बैठक दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सदन में धन्यवाद प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सर्वानंद सोनोवाल ने सोमवार को रखा था और इसका अनुमोदन करते हुए भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने अपने विचार रखे थे।
धन्यवाद प्रस्ताव क्या होता है?
धन्यवाद प्रस्ताव भारतीय संसद की एक महत्वपूर्ण औपचारिक प्रक्रिया होती है। नियम के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद प्रत्येक सदन में अलग-अलग धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाता है। यह प्रस्ताव सत्ताधारी दल द्वारा पेश किया जाता है। इस प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा होती है, सदस्य चाहें तो वे संशोधन भी पेश कर सकते हैं। धन्यवाद प्रस्ताव में अगर कहीं संशोधन की गुंजाइश होती है, उसे सही किया जाता है। चर्चा के अंत प्रधानमंत्री या अन्य कोई वरिष्ठ मंत्री जवाब देते है। मतदान के बाद प्रस्ताव पास किया जाता है। हालांकि यह परंपरा रही है कि प्रधानमंत्री ही धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हैं लेकिन इस बार विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बीच पीएम मोदी इस बार जवाब नहीं दे सके।
धन्यवाद प्रस्ताव राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रति औपचारिक आभार व्यक्त करने की प्रक्रिया है, लेकिन वास्तव में यह सरकार की नीतियों पर पूर्ण बहस और विश्वास मत जैसा महत्व रखता है।
सदन में क्या हुआ?
गुरुवार को धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण के हवाले से चीन के साथ टकराव का मुद्दा उठाने का प्रयास किया, लेकिन अध्यक्ष बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नहीं दी।
- इस मुद्दे पर सदन में पिछले चार दिन से गतिरोध की स्थिति बनी रही। मंगलवार को आसन के समीप हंगामे के दौरान कागज उछालकर आसन की ओर फेंकने के मामले में विपक्ष के आठ सदस्यों को निलंबित कर दिया गया।
- बुधवार को चर्चा में तेलुगु देशम पार्टी के (तेदेपा) के सांसद जीएम हरीश बालयोगी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने हिस्सा लिया।
- दुबे ने कुछ किताबों का जिक्र करते हुए नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधा और कई तरह के आरोप लगाए।
- आसन ने दुबे को नियम का हवाला देते हुए किसी किताब को दिखाने या उसका उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी। विपक्ष के सदस्यों ने दुबे के आरोपों पर जोरदार हंगामा किया।













