रोबोटिक्स में कामियाबी असल या सिर्फ प्रोपेगेंडा?
चीन में रोबोट्स की इतनी जबरदस्त परफॉर्मेंस देखकर सवाल उठ रहे हैं कि चीन की रोबोटिक्स के क्षेत्र में ये तरक्की असल है या फिर सिर्फ प्रोपेगेंडा? एक्सपर्ट्स भी इसे एक बड़ा विज्ञापन बता रहे हैं। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन इस तरह के प्रदर्शनों के जरिए अपनी टेक्नोलॉजिकल लीडरशिप दिखाना चाहता है।
क्या है रोबोट्स की परफॉर्मेंस के पीछे का राज?
रिपोर्ट्स के मुताबिक (REF.) कुछ एक्सपर्ट्स का दावा है कि इस सटीक परफॉर्मेंस का राज इमिटेशन लर्निंग है। इसमें रोबोट्स को एक ही काम को बार-बार करने की ट्रेनिंग दी जाती है। यही वजह है कि दर्जनों चीनी रोबोट्स एक ताल में प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए हैं। जानकार यह भी कहते हैं कि असल दुनिया या फैक्ट्रियों में काम करने के लिए इमिटेशन लर्निंग की तकनीक काम नहीं आएगी।
रोबोटिक्स की रेस और अमेरिका बनाम चीन
चीन और अमेरिका के बीच रोबोटिक्स की रेस अब जग जाहिर है। एलन मस्क पहले ही कह चुके हैं कि टेस्ला के ऑप्टिमस रोबोट को सबसे कड़ी चुनौती चीनी कंपनियों से ही मिलेगी। गौरतलब है कि 2024 के आखिर तक चीन लगभग 4.5 लाख से ज्यादा स्मार्ट रोबोटिक्स कंपनियां रजिस्टर कर चुका है। इनमें अरबों डॉलर का निवेश भी किया गया है। अमेरिका फिलहाल AI और सॉफ्टवेयर में आगे है, तो चीन रोबोट्स के बड़े पैमाने पर उत्पादन और हार्डवेयर में बाजी मारता दिख रहा है। 2026 में रोबोट्स की बिक्री दुगनी होने की पूरी संभावना है।













